अपने फायदे के लिए प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदवा रहे हैं स्कूल वाले

रांची, निखिल गोयल : राजधानी रांची में नए सेशन की शुरुआत हो चुकी है। इस समय पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए नई क्लास की नई किताबें खरीदने में व्यस्त हो जाते हैं। स्कूल में री-एडमिशन में लगने वाले पैसे और महंगी फीस को भरने के बावजूद स्कूल वाले पेरेंट्स को सुकून से रहने नहीं देते। इसी कारण तो सिर्फ प्राइवेट पब्लिशर्स से मिलने वाली कमीशन की मोटी रकम के लिए कई स्कूलों ने अपना सिलेबस और किताबें ही बदल डाली हैं। ये किताबें ख़ास दुकानों से ही खरीदी जा सकती है।धड़ल्ले से चल रहा है बिजनेस प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें एनसीईआरटी की किताबों से करीब 15 गुना ज्यादा महंगी होती हैं। दोनों का कंटेंट लगभग सेम होता है। लेकिन स्कूल वाले लिस्ट में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लिख कर देते हैं। ऐसा इसलिए कि एनसीईआरटी वाले स्कूलों को इन किताबों के लिए मात्र 5% कमीशन देते हैं, जबकि प्राइवेट पब्लिशर्स इसके बदले स्कूलों को 40% कमीशन देते हैं। दामों में भारी अंतर एनसीईआरटी की पांचवीं कक्षा की किताबों का सेट जहां 800 रुपये में आ जाता है, वहीं प्राइवेट पब्लिशर्स इसी क्लास की किताब को 5500 रुपये में बेचते हैं। प्राइवेट पब्लिशर्स स्कूल के साथ सांठ-गांठ कर अपनी महंगी किताबें बच्चों से खरीदवाते हैं।

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