नवी मुम्बई के पुलिस आयुक्त के निलंबन आदेश से भारत में संविधान के आर्टिकल 14 का उड़ा मजाक

महाराष्ट्र, नजीर मुलाणी : भारत के संविधान का मजाक आज विधायिका में बैठे वही लोग उड़ा रहे हैं, जो भारतीय संविधान के रक्षा की कसम खाते हैं। भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 में यह बात स्पष्ट रूप से लिखी है कि कानून की नजर भारत का हर नागरिक समान होगा, मगर हमारे सांसदों और विधायकों ने अपने फायदे के लिए इस आर्टिकल से अपने आपको अलग कर रखा है और अपने लिए न्याय और कानून की अलग परिभाषा स्थापित कर दी है। यह प्रसंग आज मैं नवी मुम्बई के पुलिस आयुक्त हेमंत नगराले के निलंबन के आदेश को लेकर उठा रहा हूँ। इससे पहले नवी मुम्बई के पुलिस आयुक्त हेमंत नगराले के खिलाफ कई सामान्य नागरिकों ने अपनी शिकायत गृह मंत्रालय और पुलिस महासंचालक के पास की है, मगर इन शिकायतों को कभी भी गंभीरता से नही लिया गया, यहां तक कि एक महिला पुलिस अधिकारी के पति ने जब अपनी पत्नी के हत्या मामले में पुलिस आयुक्त की भूमिका को संदिग्ध बताया तो भी मुख्यमंत्री महोदय पुलिस आयुक्त पर मेहरबान दिखे। मगर जब इसी पुलिस आयुक्त ने एक विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया तो तुरंत उसको निलंबित करने का आदेश सुना दिया गया। मुझे मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिला सहकारी बैंक में बड़े पैमाने पर आर्थिक घोटालों को अंजाम दिया गया है, मगर इसके बावजूद अध्यक्ष चुकी एक विधायक हैं, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज तबतक नही किया जा सकता जबतक मुख्यमंत्री या विधानभवन इसकी इजाजत नही दे। वाह भाई वाह क्या बात है, क्या इसी को लेकर हमारे संविधान में सभी को कानून की नजर में बराबर बताया गया है। जय हिंद

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