भाजपा विधायक की शिक्षक पत्नी ने कराई पार्टी की फजीहत

रिपोर्टर अंशुल रावत ललितपुर यूपी-ललितपुर भाजपा के सदर विधायक रामरतन कुशवाहा की शिक्षक पत्नी जिन्हें शिक्षण से कम नेतागिरी से ज्यादा सरोकार रहता है और गाहे-गबाहे पार्टी की और सदर विधायक की फजीहत कराने में कोई कसर नहीं छोड़ती ।
जिलेभर में शिक्षकों पर गजब की हनक दिखाती है विधायक जी की धर्मपत्नी।
अभी कुछ दिन पहले एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंची शकुंतला कुशवाहा जी खाने की टेबल पर सफाई ना देख कर उनका पारा सातवे आसमान पर चढ़ गया।
जिस परिवार में शादी थी उसके किसी युवक ने आपसे कुछ कह दिया इन्हें उसकी बात इतनी नागवार गुजरी कि तत्काल जखौरा थाने से पुलिस बुला कर उस युवक को हवालात की हवा खिलवा दी।
जिसके घर पर शादी थी वह रात भर हवालात में रहा मीडिया में मामला उछलने पर विधायक जी ने फोन कर युवक को सुबह छुड़वाया। तालबेहट के ए बी एस ए से कार्यालय में कथित तौर पर अभद्रता करने का शकुंतला कुशवाहा पर आरोप लगा था।
विधायक की पत्नी की शिकायत एक अदना कर्मचारी करें यह विधायक की पत्नी कैसे बर्दाश्त कर सकती थी।
लिहाजा आज इन्होंने अपनी फौज फाटा ले कर प्रशासन पर बनाया जमकर दबाव।
एक शिक्षिका ने जिलाधिकारी पर दबाव बनाया कि वह सिर्फ उन्हें ही ज्ञापन देगी।
जिले के कई आला अफसर ज्ञापन लेने के लिए उनके पास गए लेकिन उन्होंने एक न सुनी क्योंकि वह शिक्षक के अलावा सत्तारूढ़ दल के विधायक की पत्नी भी तो है ।
जिलाधिकारी के मुख्यालय पर लौटने के बाद उन्होंने प्रतिनिधिमंडल बुलाकर इनका ज्ञापन लिया।
उन्होंने बीआरसी के खिलाफ कई आरोप जड़े।मामला सत्तारूढ़ दल से जुड़ा होने के कारण प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार एबीआरसी के खिलाफ फौरी कार्यवाही भी हो चुकी है और सूत्रों की माने तो ABSA को कार्यालय अटेच किया जा सकता है। और विधायक जी की धर्मपत्नी/ शिक्षिका जी ने जो भी आरोप एबीएस ए के खिलाफ लगाए हैं वह सभी साबित भी होंगे और एबीआरसी पर कार्यवाही भी सुनिश्चित है।
अब सवाल ये उठता है क्या यह सब ड्रामा करके विधायक की धर्मपत्नी ने पूरी पार्टी की फजीहत नहीं कराई ?
यदि इन्हें ABSA से कोई दिक्कत थी तो जिलाधिकारी जी को फोन कर अवगत करा कर भी कार्यवाही कराई जा सकती थी ।
आज कचहरी में हाई वोल्टेज ड्रामा करके विधायक जी की धर्मपत्नी प्रशासन और जनता को क्या संदेश देना चाहती हैं। सत्तारूढ़ दल के विधायक की पत्नी को इस तरह आंदोलन करना क्या शोभा देता है।इस तरह् प्रदर्शन करके विरोधि दलों को एक मुद्दा नहीं पकड़ा दिया।
जिस बिभाग में आप स्वयं कार्यरत है उसी विभाग के कर्मचारियों पर आपका यह अनुचित दवाब क्या सही है।
और यह भी सही है इस तरह् आप सत्ता का लाभ लेकर या दवाव बनाकर साथियो पर अस्थाई हनक तो बना सकती है लेकिन लेकिन बहुत देर तक उनकी आवाज आप अपनी ताना शाही से नही दवा सकती।
अवसरवादियों की सलाह से सब ध्वस्त हो जाता है और अवसरबादी सब खत्म होने के बाद दूसरो की गोद मे जाकर बैठ जाते है।
अपने पूर्ववर्तियों पर जरा सी नजर डाल लें आज कोई पास में नही फटक रहा है उनके जो लाभान्वित होते रहे बो भी और जिनका नुकसान किया अवसरवादियों के कहने से बे भी नही।
या विधायक जी की पत्नी यह संदेश देना चाहती है जनता को कि इस सरकार में विधायक की पत्नी को भी सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ सकता है तो आम आदमी की बात ही क्या है।
इस सब ड्रामे के पीछे सदर विधायक की धर्मपत्नी और शिक्षिका की वास्तविक मनसा क्या है यह तो वही जाने लेकिन सदर विधायक की धर्मपत्नी का यह आचरण मेरे ख्याल से ना तो सदर विधायक और ना ही पार्टी के लिहाज से उचित है ।

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