खास मौके पर सिक्के जारी करने से मना नहीं करती धर्मनिरपेक्षता

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः धार्मिक प्रतीक वाले सिक्‍कों से धार्मिक व्‍यवहार प्रभावित होने की बात को साबित करने में नाकाम रहे याचिकाकर्ताओं की याचिका को दिल्‍ली हाई कोर्ट में खारिज कर दिया गया। याचिका में धार्मिक प्रतीक अंकित सिक्कों पर रोक और उन्हें वापस लेने की मांग की गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इन सिक्कों से धार्मिक व्यवहार प्रभावित होने की बात को साबित करने में नाकाम रहे हैं।  कोर्ट ने कहा- सिक्का निर्माण अधिनियम 2011 के तहत सरकार को ऐसा करने का अधिकार है। धर्मनिरपेक्षता यह नहीं कहती है कि आप किसी आयोजन को मनाने के लिए सिक्के जारी नहीं कर सकते हैं। बेंच ने स्मारक सिक्के का अर्थ पूछा जिस पर भारत सरकार की तरफ से कहा गया कि इसे सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 2 (बी) में परिभाषित किया गया है। जिसमें सरकार या उसके द्वारा अधिकृत कोई संस्था किसी खास मौके पर या घटना को मनाने के लिए इस तरह के सिक्के जारी कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि इससे देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर कोई असर नहीं पड़ता। कोर्ट ने आगे कहा, ‘धर्मनिरपेक्षता का मतलब सभी धर्मों का एक समान आदर करना है।’ हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में दूसरे धर्म के प्रतीकों से जुड़े सिक्के भी जारी हो सकते हैं। रिजर्व बैंक की ओर से मां वैष्णो देवी की तस्वीर वाले सिक्के जारी किए गए हैं। केंद्र सरकार ने 2010 में तंजावुर स्थित बृहदेश्वर मंदिर के 1000 साल पूरे होने पर इसकी तस्वीर वाला पांच रुपये का सिक्का जारी किया था। इसके बाद 2013 में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से जुड़ा पांच रुपये का एक और सिक्का जारी किया गया था। दिल्ली के दो नागरिकों नफीस काजी और अबु सईद ने जनहित याचिका दाखिल कर रिजर्व बैंक व वित्त मंत्रालय को वर्ष 2010 व 2013 में बृहदीश्वर मंदिर और माता वैष्णोदेवी के चित्रों वाले सिक्के वापस लेने का निर्देश देने की मांग की थी।  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायाधीश सी. हरिशंकर ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्षता किसी यादगार अवसर के मौके पर सिक्के जारी करने से नहीं रोकती।

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