खुद की परवाह छोड़ डॉक्टरों ने बचाई मां-नवजात की जिंदगी

पटना, बिहार/केदार प्रसादः नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) गायनी ओटी के ठीक नीचे सीढ़ी पर लगे विद्युत पैनल में लगी आग की गर्मी ओटी में पहुंचने लगी थी। जलते तार से निकलते धुएं के कारण आंखों में जलन हो रही थी। बदबू से सांस लेना मुश्किल होने लगा था। ओटी टेबल पर लेटी बबीता की बच्ची को रात 7:05 बजे ऑपरेशन कर निकाला जा चुका था। पेट व काटे गए अन्य हिस्से की स्टिचग जारी थी। इसी बीच ओटी की बिजली बंद हो गई। बाहर आग लगने और भागने का शोर मचा था। लोगों के बीच मची अफरा-तफरी की आवाज कानों तक पहुंच रही थी। गायनी की प्रोफेसर डॉ. ममता ¨सह की यूनिट एवं डॉ. बिन्दु आर्या के मार्गदर्शन में प्रसूता बबिता देवी का ऑपरेशन कर रही पीजी छात्रा डॉ. निर्मला कुमारी एवं डॉ. ममता रानी ने मंगलवार को ओटी के हालात बयान किये। इन जांबाज डॉक्टरों ने बताया कि ओटी से निकल भागने का एक ही रास्ता खुला था। आग बढ़ने, उस रास्ते के बंद हो जाने, नीचे ऑक्सीजन यूनिट में विस्फोट होने जैसे कई संभावित खतरों के बारे में सोच कर डर लग रहा था। ओटी में वैकल्पिक लाइट एवं मोबाइल की रोशनी में डॉक्टरों ने बबीता के पेट की सिलाई जारी रखी। डॉ. बिन्दु आर्या और कर्मी बाहर हालात का जायजा लेने के लिए निकले। ओटी में दो डॉक्टर, दो नर्स और दो ओटी कर्मी थे। ओटी में धुआं बढ़ता ही जा रहा था। मरीज बबीता लगातार मिन्नतें कर रही थी कि मैडम मुझे इस हालत में अकेला छोड़ कर मत जाइएगा। डॉक्टर लोगों ने मरीज का हौसला बनाए रखा। ओटी से धुआं निकालने के लिए सभी खिड़कियों को खोल दिया गया। इसी बीच सभी खांसने लगे। मरीज की स्टिचग जल्दी से पूरी कर उसे और नवजात को कर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाल कर आइसीयू में पहुंचाया। सभी बाहर भागे। डॉ. ममता रानी की तबियत बिगड़ने लगी थी। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। धुआं अंदर जाने के कारण घबराहट बढ़ गई थी। तुरंत डॉ. ममता को मेडिकल इमरजेंसी में ले जाकर ऑक्सीजन लगाई गई। करीब आधे घंटे तक ऑक्सीजन देने के बाद डॉ. ममता की स्थिति सुधरी। खुद की परवाह छोड़ कर एक मां और उसके पहले बच्चे को ओटी से सुरक्षित बाहर निकालने की खुशी डॉक्टरों एवं ओटी कर्मियों के चेहरे पर साफ दिख रही थी। बाहर लगी आग को बुझाने में सुरक्षा कर्मी अशोक कुमार, रामा राय और सुनील ¨सह के प्रयास की भी तारीफ होती रही।

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