ग्राम पंचायत के कार्यकरण में सुधार एवं मजबूत किया जाये: सांसद पटेल

जालोर, राजस्थान/पीराराम पटेल: सांसद देवजी पटेल ने गुरूवार को लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान पंचायती राज सस्थाओं के कार्यकरण में सुधार करने तथा ग्राम पंचायतों को सशक्त करने का मुद्दा उठाया। सांसद पटेल ने पंचायती राज के राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला से प्रश्न करते हुए बताया कि क्या सरकार पंचायतों के प्रभावी कार्यकरण सुनिचिश्त करने के लिए ग्रामीण कर्मचारियों और महत्वपूर्ण स्थानीय अधिकारियों जैसे कि अध्यापको, चिकित्सकों, आंगनवाडी कार्यकर्ताओं, कृषि सहायक, पशु चिकित्सकों, विद्युत तथा टेलिकाॅम विभाग के लाईनमैनों जिनका सभी ग्रामीणों से वास्ता पड़ता रहा है, को ग्राम सभा कि निगरानी में उनकी सेवाएं लेने पर विचार कर ही है; यदि हा तो तत्सबंधी ब्यौरा क्या हैं। सांसद पटेल ने कहा की सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के कार्यकरण में सुधार करने तथा पंचायतों को सशक्त करने, उनके कर्मचारियों का विकास करने, उन्हे धनराशि प्रदान करने के लिए क्या कदम उठाए गए है? सांसद पटेल के प्रश्न का जबाब देते हुए पंचायती राज राज्य मंत्री ने बताया कि संविधान के भाग 9 के अनुच्छेद 243 छ में राज्यों द्वारा पंचायतों को संविधान की 11वीं अनुसूचि में सूचीबद्ध विषयों सहित शक्तियों औंर अधिकार प्रदान करने के मामले में राज्यों को अपने विवेक के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है, ताकि उन्हे आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने और लागू करने के लिए स्थानिय स्व-शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाया जा सकें। पंचायतों के कर्मियों की निगरानी सहित, शक्तियों और अधिकारों के अंतरण की सीमा और गति, राज्य दर राज्य भिन्न-भिन्न है सरकार की कुछ योजनाओं में, पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को योजनाओं के कार्यान्वयन और निगरानी में केन्द्रीय भूमिका सौंपी गई है। उन्होने बताया कि पंचायती राज मंत्रालय, पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को मजबूत बनाने के लिए कार्यक्रम समर्थन, अंतर-मंत्रालयी और बहु-क्षेत्रीय समन्वय के लिए पक्ष समर्थन और पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और कर्मियों के क्षमता निर्माण के लिए सहायता प्रदान करता रहा है ताकि उनकी कार्यशीलता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके। 14वें वित्त आयोंग (एफएफसी) के अंतर्गत, सविधान के भाग 9 के तहत गठित ग्राम पंचायतों (जीपी) को बुनियादी सेवाओं की प्रदायगी के लिए वर्ष 2015 से 2020 तक की अवधि हेतु 2,00,292.20 करोड़ रूपये आवंटित किए गए हैं। एफएफसी निधियों से ग्रामीण इलाकों में लोगों की जीवन की परिस्थिति में सुधार की उम्मीद है क्योंकि ये गांवों के लोगों के लिए मूलभूत सेवाएं और अन्य आवश्यक बुनियादी ढाचें के प्रावधानों से संबंधित हैं। ग्राम पंचायतों द्वारा बुनियादी सेवाओं के घटकों के भीतर प्रचालन और रखरखाव तथा पूंजीगत व्यय के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सहायता के रूप में मूल अनुदान आवंटन का 10 प्रतिशत का उपयोग किया जा सकता हैं। मंत्रालय ने नियोजन, बजटन, कार्यान्वयन, लेखांकन, निगरानी और प्रमाण पत्र जारी करने जैसी नागरिक सेवाओं के वितरण सहित पंचायतों के कामकाज के विभिन्न पहलुओं को संबोधित करने के लिए महत्वपूर्ण सामान्य अनुप्रयोगों के एक सूइट, जिसे सामूहिक रूप से पंचायत एटरप्राइज सूइट (पीईएस) अनुप्रयोग कहते है का विकास किया हैं।

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