जनसेवा पतसंस्था ने रखी अनोखी मिसाल – आवटी

जनसेवा पतसंस्था ने रखी अनोखी मिसाल – आवटी

अहमदनगर, महाराष्ट्र/दीपकसा क्षत्रियः श्रध्येय अटल बिहारी वाजपेयीजी जब बेलापूर आये थे तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पक्ष का शुभारंभ उन्होने किया था।  उस वक्त अटल जी के सपनों के कार्य और कार्यकर्ताओं को देखने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ, ऐसे भाउक उद्गार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रथम श्रेणी के कार्यकर्ता तथा भाजपा के जेष्ठ नेता हेरंबजी आवटी ने किया। बेलापुर के जनसेवा पतसंस्था के माध्यम से मातृ पितृ सन्मान, जेष्ठ नागरिक एवम् जेष्ठ महिलाओं का सम्मान और विविध विषयो मे अपना प्रभावशाली यश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा संस्कृत भाषा मे विशिष्ठ योगदान देने वाले स्नातकों को विशेष पुरस्कार से सन्मानित किया गया। जनसेवा पतसंस्था 17वे साल मे पदार्पण कर रही है, उसी के उपलक्ष मे स्नेह समारोह का आयोजन किया गया।  प्रमुख अतिथि डॉ जयराम जी खंडेलवाल, हेरंबजी आवटी, रणजितजी श्रीगोड, राजेंद्र खानविलकर, किशोर खानविलकर, बेलापूर के सरपंच श्री भरतजी सालुंके उपस्थित थे। डॉ जयरामजी खंडेलवाल ने कहा कि जनसेवा पतसंस्था के संस्थापक चेयरमेन सम्मानिय सुवालालजी लुंकड इन्होने संस्था के माध्यम से बहुत सारे सेवाभावी उपक्रम का निर्माण किया जैसे कि जरुरतमंद लोगोंको झुनका भाकर केन्द्र, श्री केशव गोविंद मंदिर के जीर्णोद्धार के लिये योगदान, जेष्ठनागरिकों को हर साल तीर्थयात्रा का आयोजन आदी, उनकी कार्यकुशलता एवम् कल्पकता से संस्था प्रगती की ओर बढ रही है। इसलिए सुवालालजी लुंकड और पतसंस्था के संचालक मंडल का विशेष रुप से अभिनंदन किया। इस वक्त जेष्ठ मातृ पितृ दंपती, जेष्ठ स्त्री पुरूष नागरिक, संस्कृत भाषा के स्नातक तथा केशव गोविंद मंदिर जीर्णोद्धार के दाता, झुणका भाकर केंद्र के दाता, संस्कृत शिक्षक, संवाददाता आदि का स्मृतिचिन्ह, मोतीहार और स्नेहवस्त्र देकर सम्मान किया गया। प्रास्ताविक संस्था के कार्याध्यक्ष श्री राहुल जी दायमा इन्होने किया, स्वागत और सूत्रसंचालन अमितजी लुंकड और प्रविणजी लुंकड ने किया। रविंद्र जी कोलपकर ने आभार व्यक्त किये। इस समारोह मे अध्यक्ष श्री सुवालालजी लुंकड, उपाध्यक्ष सुभाषचंद्रजी राठी, संचालक प्रवीणजी लुंकड, दीपक वैष्णव, प्रकाश चंद्रजी कोठारी, योगेश कोठारी, ॲड सुरेशचंद्रजी बांठिया, सचिन कोठारी, संचालीका सुवर्णा मुंडलिक, नंदाताई खंडागले आदी मान्यवर उपस्थित थे। अंत मे स्नेह भोजन से समारोप हुआ।

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