दिल्ली वालों को मोदी सरकार का तोहफा, दो साल तक नहीं चलेगा लाखों घरों पर बुलडोजर

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः लोकसभा ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अवैध कालोनियों और स्लम को दंडात्मक कार्रवाई से मुक्ति दिलाने संबंधी विधेयक को पारित कर दिया। तर्कसंगत व्यवस्था बनाने के लिए ढांचा तैयार होने तक ऐसी बस्तियों पर कार्रवाई नहीं हो सकेगी। दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) विधेयक में स्लम एवं कुछ अवैध निर्माणों को 31 दिसंबर 2020 तक प्रतिरक्षा दी गई है। मौजूदा विधेयक में दी गई प्रतिरक्षा की अवधि 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है। शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि विधेयक पारित नहीं हुआ तो राष्ट्रीय राजधानी में अप्रत्याशित अफरातफरी मच जाएगी। विधेयक जहां जैसा है के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई से 31 दिसंबर 2020 तक मुक्ति दिलाएगा। हरदीप पुरी ने दिल्ली की पूर्व की शीला दीक्षित सरकार पर इस मुद्दे को लेकर उचित नीति सामने नहीं लाने के लिए हमला किया। यह व्यापक स्तर पर शासन की विफलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कानून के तहत एक जनवरी 2006 तक अतिक्रमण या गैरकानूनी डेवलपमेंट, 31 मार्च 2002 तक मौजूद ग्रामीण आबादी क्षेत्र और जहां आठ फरवरी 2007 तक निर्माण हुए, वहां 31 दिसंबर 2017 तक स्थानीय प्राधिकार कार्रवाई नहीं कर सकेगा। वहीं, सरकारी जमीन को लेकर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार से जुड़ी खुली जमीन पर कब्जा कर कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल करने का किसी को अधिकार नहीं है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी हरिशंकर का यह आदेश सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के उस फैसले पर आया, जिसमें उन्होंने पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में सरकारी जमीन को कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठाया था। मजिस्ट्रेट ने उत्तम नगर के एक गैर सरकारी संगठन कब्रिस्तान इंतजामिया एसोसिएशन को नोटिस जारी कर पूछा था कि यह सरकार के कब्जे में कैसे आया और कब्रिस्तान के रूप में इसका इस्तेमाल कब से हो रहा है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता एनजीओ ने एक विधायक द्वारा दिए गए बयान के आधार पर सरकारी जमीन का इस्तेमाल शुरू किया था। पीठ ने पाया कि 1 अगस्त 2017 को सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया फैसला कहीं से अनुचित नहीं है और सभी को इसे मानना होगा।  साथ ही स्थानीय विभागों को फैसले का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह कहते हुए गैर सरकारी संस्था की याचिका खारिज कर दी कि किसी भी व्यक्ति को सरकारी जमीन का दुरुपयोग या कब्जा करने का अधिकार नहीं है।  भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने दिल्ली की आप सरकार पर हमला किया। अवैध कालोनियों और स्लम पर नीति नहीं लाने का आरोप लगाया। दक्षिणी दिल्ली के सांसद रमेश बिधूरी ने पानी शुल्क में वृद्धि का मुद्दा उठाया। ऐसा कर अरविंद केजरीवाल सरकार ने लोगों को धोखा दिया।

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