मध्य प्रदेश में बढ़ी मोरों की आबादी

नीमच, मध्यप्रदेश/नगर संवाददाताः मध्य प्रदेश में एक गांव ऐसा है, जहां ग्रामीणों से ज्यादा मोरों का बसेरा है। नीमच जिले के इस गांव को मोरों का गांव कहा जाता है। गांव में लगभग 700 लोग निवास करते हैं, इसके उलट गांव और आसपास के जंगल में 800 से ज्यादा मोर विचरण करते हैं। ऐसा लगता है जैसे मोरों की बस्ती में लोग रहने के लिए चले गए हों। जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भगोरी का गांव वासनिया है। यहां सुबह-शाम बड़ी संख्या में मोर विचरण करते हैं। इसका कारण गांव के आसपास 800 से ज्यादा खिरनी के विशालकाय पेड़ और दो बड़े तालाब हैं। मोरों की सुरक्षा के प्रति ग्रामीण भी बेहद सजग हैं। बड़े पेड़ों पर मोर आसानी से रह लेते हैं, साथ ही इन पर लगने वाले खिरनी के फल से इनकी भूख भी मिट जाती है। गांव में मोरों की ज्यादा संख्या कई सालों से बनी हुई है। परसराम पटेल (70) और सीताराम नागदा (75) बताते हैं कि हम बचपन से ही गांव व आसपास के क्षेत्रों में मोरों को इसी तरह देख रहे हैं। 800 से ज्यादा विशालकाय पेड़ और दो बड़े तालाब हैं इनका ठिकाना, मोरों की सुरक्षा को लेकर बेहद सजग रहते हैं ग्रामीण मोरों की सुरक्षा और बेहतर माहौल देने वाले नीमच जिले के वासनिया और भगोरी गांव के लोगों की वन विभाग मदद भी करेगा। उनकी सुविधाओं में इजाफे की कोशिश करेगा। गांव व आसपास के क्षेत्रों में मोर बहुत हैं। हम मोरों के झुंड को कई सालों से देख रहे हैं। खिरनी के पेड़ों व पानी की उपलब्धता के कारण यहां मोरों का बसेरा है। ग्रामीण मोरों की सुरक्षा भी करते हैं। इन्हें शिकारियों से भी बचाते हैं।

 

 

 

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