पुलिस ने दोहराया दोबारा क्राइम सीन

पाली, राजस्थान/गोविंद कुमावतः चेन्नई के कोलतूर इलाके स्थित महालक्ष्मी ज्वैलर्स के यहां 16 नवंबर को हुई चोरी के आरोपी नाथूराम को पकड़ने आई पुलिस टीम पर जैतारण के पास रामावास गांव में मंगलवार देर रात हमला हो गया, जिसमें मदुरावोयल थाने के इंस्पेक्टर पेरियापांडीयन की गोली लगने से मौत हो गई। चेन्नई पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक रात करीब ढाई बजे जब उन्होंने आरोपी को पकड़ने के लिए चूने के भट्‌टे पर दबिश दी थी तब वहां मौजूद औरतों-बच्चों आरोपी ने उन पर हमला कर दिया। इस दौरान इंस्पेक्टर की सर्विस पिस्टल गिर गई, उससे आरोपी ने फायर किया और गोली इंस्पेक्टर पेरियापांडीयन के शरीर के पार हो गई। वारदात के बाद मुख्य आरोपी नाथूराम मौके से भाग निकला। जैतारण पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर हमले में शामिल अन्य सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया। भास्कर ने पैरलल इंवेस्टिेगेशन करते हुए घटनास्थल पर सबूत जुटाए और हालात देखे जिसके अनुसार घटनाक्रम चौंकाने वाला था। पिस्टल गिरने या छीनकर गोली मारने जैसे सबूत भी नहीं मिल रहे। जांच का विषय यह भी है कि गोली मृत इंस्पेक्टर की पिस्टल की है या साथी इंस्पेक्टर मुनीशेखर के पिस्टल से निकली। बहरहाल जैतारण पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना की सूचना के बाद एसपी दीपक भार्गव, एसपी ज्योतिस्वरूप शर्मा सहित कई थानाधिकारी मौके पर पहुंच गए। चेन्नई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर संतोष कुमार भी रवाना हो गए हैं। इधर, जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम करवाया गया, जिसे गुरुवार की फ्लाइट से चेन्नई ले जाया जाएगा।
उधर चेन्नई पुलिस कमिश्नर एके विश्वनाथन इंस्पेक्टर पेरियापांडीयन के घर पहुंचे और उनकी मौत के जिम्मेदारों को सख्त सजा दिलाने का भरोसा दिया है। प्रारंभिकजांच में पुलिस की पिस्टल से ही गोली चलने की बात सामने आई है। खोल घर के बाहर मिला है। किसने कितनी दूर से गोली चली या सब एक्सीडेंटल हुआ यह जांच का विषय है। चेन्नई के मदुरावोयल थाना क्षेत्र में 16 नवंबर को जब महालक्ष्मी ज्वेलर का मालिक मुकेश जैन लंच में घर गया तो आरोपियों ने छत में सेंध मारकर साढ़े तीन किलो सोने पांच किलो चांदी के जेवरात तथा दो लाख रुपए चुराए थे। नाथूराम ने चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए शोरूम के ऊपर ही कपड़े का व्यवसाय करने के लिए दुकान किराए पर ली। शाम को घर जाते समय मालिक सब आभूषण लॉकर में रखकर जाता था आरोपी को पता था कि दिन में 1 से 4 बजे तक मालिक लंच के लिए घर जाता है और इस दौरान आभूषण बाहर ही रहते हैं। इसलिए उसने दिन में 2 बजे चोरी की। बिलाड़ा थाना क्षेत्र का दिनेश खारिया नीव का दीपाराम उसके साथ था। तीनों ने ड्रिल से छत में छेद किया था। वहां के सीसीटीवी भी उखाड़ दिए थे, बाद में आस-पास के कैमरों की छानबीन से पहचाने गए थे।

1. नाथूराम साथियों के पकड़े जाने पर यहां छिपा था, वह अलर्ट था। इसलिए उसने लाठी से हमला किया और भाग गया। वह क्यों रुकता? घरवालों ने पुलिस को घेरा ताकि वह भाग सके।

2. यह गोली रिवाल्वर की नहीं थी, पिस्टल की थी। जिससे गोली चलाने के लिए कोक करना पड़ता है सीधे ट्रिगर दबाने से नहीं चलती है। नाथूराम ने कभी पिस्टल नहीं चलाई होगी, क्योंकि वह हथियार चलाना जानता तो हथियार रखता, लाठी लेकर नहीं सोता।

3. सबसे अहम बात जो उक्त घटना को सही ठहराती है वह है गोली का खोल घर के बाहर मिलना। इंस्पेक्टर घर के अंदर घिरा था। पिस्टल भी वहीं गिरी अथवा छीनी गई थी तो गोली भी वहीं से चलती तो उसका खोल चार दीवारी के बाहर नहीं मिलता।

 

4. पाली पुलिस के बजाय शुरू से ही चले सेठ के इशारे पर, 16 नवंबर को चोरी, 17 को चेन्नई पुलिस पहुंच गई जैतारण, चोरी की घटना 16 नवंबर को हुई। ज्वेलरी शोरूम मालिक मुकेश जैन भी पाली जिले के बाबरा गांव का निवासी है। अगले ही दिन चेन्नई पुलिस ने जैतारण में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे दी। जाहिर है वहां से 24 घंटे में तो ट्रेन से भी नहीं पहुंच सकते। संभव है कि हवाई जहाज से आए। तो खर्च किसने उठाया। टीम ने 22 नवंबर को फिर दबिश दी लेकिन आरोपी नहीं मिले। इसके बाद 11 दिसंबर को टीम पाली एसपी से भी मिली। एसपी के निर्देश के बावजूद उन्होंने जैतारण थाना पुलिस को नहीं बताया अौर अपने स्तर पर ही पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह सूचना भी जैतारण पुलिस के पास नहीं थी। रात 2.30 बजे उन्हीं की निशानदेही पर आरोपी के घर रामावास स्थित चूना भट्टा पहुंचे। बिना लोकेशन जांचे-परखे, बिना वर्दी के सीधे घर में घुस गए। टीम में किसी को हिंदी बोलना भी नहीं आता। एकदम से हमला हुआ तो मुकाबले के बजाय भाग छूटे। जबकि वहां आरोपियों के पास लाठी सरिये से घातक हथियार नहीं होने की बात सामने रही है।

5. घटनास्थल पर दो इंस्पेक्टर सहित, दो हैड कांस्टेबल और एक सिपाही गए। दोनों इंस्पेक्टर के पास पिस्टल थी। अंदर थे मुख्य आरोपी सहित तीन पुरुष, छह महिलाएं और बच्चियां। घिरे तो मुकाबले के बजाय साथी इंस्पेक्टर को छोड़ भागे, बाहर कार में बैठा था किराए से ली गई टवेरा कार का ड्राइवर और शोरूम मालिक। पुलिस अधिकारी सर्विस रिवाल्वर या पिस्टल बांयी तरफ टांगते हैं, जबकि गोली लगी है दांयी तरफ बगल में, छीनाझपटी का तो सवाल ही, आरोपी गोली चलाते तो नजदीक से भी चलती, साथ ही सामने, कनपटी पर या कहीं और लगती। जबकि पोस्टमार्टम के दौरान देखी गई बॉडी में यह दूर से चलाई हुई प्रतीत हो रही है। तो फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि एकदम से हमले के बाद हड़बड़ाई टीम ने ही फायरिंग शुरू की और वही गोली साथी इंस्पेक्टर को लगी। घटनास्थल पर इंस्पेक्टर को गोली लगने के बाद चेन्नई पुलिस टीम ही उसे जैतारण अस्पताल लेकर पहुंची, तब तक स्थानीय पुलिस को नहीं थी सूचना। अस्पताल से जैतारण पुलिस फिर एसपी को मिली घटना की जानकारी। मौके पर जो गोली का एक ही खोल मिला वह पुलिस की ही पिस्टल का। वह भी घर से बाहर की तरफ। छीना झपटी में आरोपियों के पिस्टल छीनकर गोली चलाने की बात गले नहीं उतरती। क्योंकि पिस्टल को कॉक करना पड़ता है, रिवॉल्वर होती तो समझ आता कि छीना झपटी में ट्रिगर दब गया। अगर आरोपी गोली चलाते तो फिर एक ही नहीं चलाते। दो दिन पहले पाली एसपी से मिली थी चेन्नई पुलिस टीम, एसपी ने कहा था जब कार्रवाई करें बता देना स्थानीय टीम पूरा सहयोग देगी। इसके बावजूद सूचना नहीं दी, अपने स्तर पर ही पहले दो आरोपियों को उठाया और उसके बाद उनकी निशानदेही पर रात 2.30 बजे मुख्य आरोपी नाथूराम जाट के घर पहुंच गई। सेठाें के इशारों पर चेन्नई पुलिस का यही ट्रेंड, स्थानीय पुलिस को बताए बिना अपने स्तर पर मामले निबटाती है, जालोर में एक आरोपी का एनकाउंटर हो चुका है।  यह पहला मामला नहीं है कि चेन्नई पुलिस सीधे आई और आरोपी पर कार्रवाई कर दी। अक्टूबर में ही सांचौर के निकट में ऐसे ही केस में चेन्नई पुलिस ने आरोपी भीमसिंह का एनकाउंटर कर दिया था। तब भी स्थानीय पुलिस को भनक नहीं थी। चूंकि इनमें फायरिंग हुई और मौत हुई इसलिए ये मामले सामने आए। अन्यथा बड़ी संख्या में ऐसे केस भी हैं कि पुलिस स्थानीय पुलिस को बताए बिना यहां से आरोपियों को उठाकर ले गई।

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