कुर्ला टर्मिनस पर रिक्शा और टॅक्सी चालकों की शुरू है दादागिरी

मुंबई, महाराष्ट्र/नजीर मुलाणीः उपनगर के कुर्ला टर्मिनस हमेशा कोई न कोई विवादों में रहा है, इसे रेलवे प्रशासन की लापरवाही कहना कोई गलत नही होगा चाहे वो टिकट से जुड़ा हो या दलालों के कब्जे से तो हमेशा विख्यात रहा कुर्ला टर्मिनस लेकिन वही अब नया मामला प्रकाश में आया है।कुर्ला टर्मिनस के बाहर रिक्शा तथा टॅक्सी चालकों की दादागिरी से ट्रैफिक पुलिस और रेलवे प्रशासन को एक बार फिर यात्रियों के निशाने पर आना पड़ा है। कुछ यात्रियों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर भारत से आने वाली गाड़ीयों के यात्रियों को रिक्शा चालक और टॅक्सी चालक मनमाने किराये वसूल रहे है। जबकि राज्य सरकार के आरटीओ नियमानुसार मीटर निर्धारित किये होने के बाद भी ट्रैफिक पुलिस तथा रेलवे प्रशासन के कुछ भ्रस्ट अधिकारियों की वजह से रिक्शा तथा टॅक्सी चालकों का मनोबल बड़ चूका है जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।अभी हाल ही में उत्तर भारत से लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर मानवता के भारत अखबार के संपादक सतीश गुप्ता ने बताया की कुर्ला टर्मिनस पर रिक्शा तथा टॅक्सी चालकों की दादागिरी से बाहर से यात्रियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है।स्वतः सतीश गुप्ता के साथ रिक्शा चालकों ने कोहिनूर कमानी तक 150 रूपये की मांग की जबकि वहाँ तक की दुरी बहुत ही कम से लेकिन उनका तय किया हुआ किराया देने के बाद ही यात्रियों को लेकर जाते है। सूत्रों ने बताया की आजकल शेयर रिक्शा टॅक्सी का कुछ प्रचलन निजी संस्थाओं ने खोल रखा है।और कुछ ट्रैफिक पुलिस और रेलवे प्रशासन ने रिक्शा तथा टॅक्सी चालकों को टर्मिनस पर पाल रखा है।हर एक रिक्शा तथा टॅक्सी वालों से 20 से 30 रूपये एक ट्रिप का वसूल करते है जो सीधा इनकी रिश्वतखोरी का सबूत दर्शाता है।जिससे कभी भी लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर देखा जा सकता है।

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