प्रभु श्री राम युवाओं के आदर्श – साध्वी श्रेया भारती जी

प्रभु श्री राम युवाओं के आदर्श – साध्वी श्रेया भारती जी

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा चिराग दिल्ली में सात दिवसीय श्री राम कथा का भव्य आयोजन किया गया है। जिसके अन्तर्गत भगवान की दिव्य लीलाओं व उनके भीतर छिपे हुए गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को कथा प्रसंग व सुमधुर भजन संकीर्तन के माध्यम से उजागर किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन ‘दो वरदान’ और ‘वन गमन’ प्रसंग के तहत सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी श्रेया भारती जी ने बताया कि राम के राज्याभिषेक की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ हो रही थी कि तभी मंथरा ने अमृत भरे कलश में आकर विष की बूंद मिला दी और उसके बहकावे में आकर महारानी कैकेयी भी अपने प्राणों से प्रिय राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगने के लिए तैयार हो जाती है क्योंकि कैकेयी के ऊपर मंथरा के कुविचारों का प्रभाव पड़ गया था। वन के लिए जाते समय प्रभु श्री राम युवाओं के आदर्श बन कर उभर रहें हैं। जो अपने व्यक्तित्व से युवाओं को बताना चाहते हैं कि किस तरह अपने राष्ट्र के लिये अपने परिजनों, स्वयं के सुखों तथा अपने आप को बलिदान करने के लिए तैयार रहना चाहिये। अपने सुखों को देश के लिए कुर्बान कर देना ही युवाओं का श्रृंगार है। युवावर्ग सामाज का मेरुदंड है। जिसके ऊपर भारत का गौरवमयी महल खड़ा होता है। वो आज नशे में अपने आप को बर्बाद कर रहा है। साध्वी जी ने बताया कि आर्थिक मंदी, बेरोज़गारी, निरंतर तनाव व दबाव तथा पल-पल बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने आज युवा पीढ़ी को नशे के भयावह साम्राज्य का पथिक बना दिया है। स्वतंत्र देश का वासी होते हुए भी वह नशे की गिरफ्त में आकर पराधीनता का जीवन व्यतीत कर रहा है। जिस युवा के सहारे कोई देश स्वयं के लिए समुज्जवल भविष्य की किरणें देखता है आज वही युवा अपने देश के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह बनकर खड़ा हो गया है। नशे का यह दैत्य विकराल रूप धारण करता हुआ देश के युवा वर्ग को खोखला करता जा रहा है। देश के लगभग 73 मिलीयन लोग नशे के आदी हो चुके हैं जिनमें से 24 प्रतिशत की उम्र तो 18 साल से भी कम है। यह वह युवा शक्ति है जिसके आधर पर हम 2020 में विकसित राष्ट्र और 2045 तक विश्व की महाशक्ति बनने का स्वप्न देख रहे हैं, जो आज नशे की कंटीली राहों पर भटक रही है। यौवन इस बात पर निर्भर करता है कि आप में प्रगति करने की कितनी योग्यता है। हारे-थके मन से कोई युवा नहीं होता। यौवन तो वह है जो अपने महावेग से समस्याओं के गिरि शिखिरों को काट दे व विषमताओं के महा वट को उखाड़ दे। यदि किसी देश पर संकट के बादल छाए हैं तो युवा शौर्य ने ही प्रचंड प्रबंधन बन कर निदान किया है। साध्वी जी ने कहा कि सामाज की प्रत्येक समस्या मन के स्तर पर जन्म लेती है और इसका समाधान भी मन के स्तर पर ही होना चाहिए। जब तक मानव मन को नियंत्रित करने की पद्धति नहीं प्रदान की जाती तब तक सामाज में भयानक कुरीतियाँ व व्याधियाँ जन्म लेती रहती हैं। इस मन को काबू में करने हेतु ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है। जिससे विवेक शक्ति जागृत होती है। फिर ही व्यक्ति मन में उठती दुर्भावनाओं व वासनाओं पर नियंत्रण रख सकता है। नशा उपचार हेतु सरकारी, गैर सरकारी संगठनों द्वारा उपचार साधन या पद्धति लागू हो चुकी है लेकिन यह कितनी कारगार सिद्ध हो रही है यह किसी से भी नहीं छिपा है। भारत का ड्रग रिकॉर्ड कहता है कि उपचार के बावजूद भी 80 प्रतिशत नशाखोर फिर से नशा करने लगते हैं। उपचार प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका शरीर नशा मुक्त हो जाता है पर नशे की लत दिमाग से नहीं निकल पाती। इन पद्धतियों के बारे में जितनी भी जानकारी उपलब्ध हुई है वे अमोघ नहीं कही जा सकती। उनके विषय में व्यवस्थित व उचित खोज अभी शेष है। सामाज में फैल रही नशे की समस्या पर रोक लगाने के लिए तथा जन मानस का सही मार्ग दर्शन करने के लिए संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ने ‘बोध’ नामक नशा उन्मूलन कार्यक्रम की स्थापना की जिसके अन्तर्गत ब्रह्मज्ञान की अमोघ पद्धति के द्वारा हज़ारों की संख्या में लोग नशा मुक्त हो चुके हैं।

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