फोर्टिस अस्पताल में डेंगू के इलाज के दौरान बच्ची की मौत

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः दिल्ली से सटे गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल पर सवाल उठ रहे हैं। डेंगू के इलाज के लिए भर्ती सात साल की बच्ची के इलाज में 2700 ग्लव्स और 500 सिरिंज का इस्तेमाल करते हुए 15.59 लाख का बिल बना दिया गया, लेकिन फिर भी बच्ची की जान नहीं बची. इस मामले पर अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अस्पताल पर कार्रवाई करने की बात कही है।  दरअसल, जुड़वा बहनों में से बड़ी आद्या को दो महीने पहले डेंगू हुआ था, जिसके बाद उसे द्वारका के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डेंगू होने के पांचवें दिन रॉकलैंड से फोर्टिस ले जाया गया, जहां अगले ही दिन बिना जानकारी दिये उसे वेंटिलेटर पर डाल दिया गया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ती गई और फिर ब्रेन से लेकर किडनी तक पर असर पड़ गया। इस दौरान चार लाख रुपया तो सिर्फ दवाई का बिल बनाया गया। दीप्ति बताती हैं कि बेटी की मौत के बाद जिस कपड़े में शव को लपेट कर दिया गया उसका पैसा भी फोर्टिस अस्पताल ने वसूला है। उन्होंने बताया कि एक तो बेटी बची नहीं उपर से अस्पताल ने 15.59 लाख रुपये का बिल थमा दिया। इस मामले को लेकर फोर्टिस अस्पताल ने लिखित सफाई में कहा है, ‘’सात साल की बच्ची आद्या को एक दूसरे प्राइवेट अस्पताल से 31 अगस्त को लाया गया था। उसको डेंगू था जो शॉक सिंड्रोम की स्टेज पर थी. हमने इलाज शुरु किया लेकिन उसके ब्लड प्लेटलैट्स लगातार गिर रहे थे। हालत खराब होने पर हमने 48 घंटों के अंदर वेंटिलेटर पर रखा।’’ अस्पताल ने आगे बताया, ‘’परिवार को बच्ची की नाजुक हालत के बारे में बताया गया था। परिवार से बच्ची के बारे में रोजाना बात की गई। 14 सितंबर को डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर बच्ची को अस्पताल से ले गए और उसी दिन बच्ची की मौत हो गई। बच्ची के इलाज में हमने सभी स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस का ध्यान रखा। 20 पन्नों के बिल के बारे में परिवार को पूरी जानकारी दी गई, जब वो हॉस्पिटल छोड़कर गए।’’  वहीं, इस मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पूरी जानकारी मांगी है. इस मामले को लेकर नड्डा ने कहा है कि वो कार्रवाई करेंगे। ट्विटर पर सांसद राजीव चंद्रशेखर ने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को टैग किया था।

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