पश्चिम बंगाल में डेंगू से फिर दो की मौत

Kolkataकोलकाता, पश्चिम बंगाल/बबिताः डेंगू को लेकर राज्य में काफी गंभीर स्तिथि बनी हुई है। पश्चिम बंगाल में डेंगू तथा अज्ञात बुखार का कहर जारी है। हर रोज कई लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अज्ञात बुखार से उत्तर 24 परगना में एक महिला की महानगर के आरजी कर सरकारी अस्पताल में मौत हो गई। डेंगू तथा अज्ञात बुखार से राज्य में लगभग 100 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। पश्चिम बंगाल के बहुत से हिस्सों में डेंगू से मरने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार की रात विधाननगर छेत्र के सॉल्टलेक में डेंगू से पीडि़त दो और महिलाओं की मौत हो गई। उनकी पहचान तुली नस्कर और दीपाली नंदी के रूप में हुई। तुली बागुईआटी की रहने वाली थी, बताया जाता है तुली का पति जय गोपाल नस्कर भी डेंगू से पीडि़त है। उसे बाइपास स्थित एक गैरसरकारी अस्पताल में भर्ती है। जानकारी के मुताबिक तुली पिछले कई दिनों से बीमार थी। उसके खून की जांच कराने पर डेंगू होने की पुष्टि होने के बाद पहले उसे गैरसरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहां उसकी हालत बिगड़ती देख इएम बाइपास स्थित गैर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं शनिवार की रात तुली ने अंतिम सांस ली। एक और घटना ढाकुरिया में घटी। जंगीपाड़ा निवासी दीपाली को गत 10 नवंबर को बुखार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार की रात दीपाली ने अंतिम सांस ली। उसके मृत्यु प्रमाण पत्र में डेंगू से मौत की पुष्टि की गई है। डेंगू से दो महिलाओं की मौत के बाद इलाके में आतंक और क्रोध का माहौल बना हुआ है। लोग इसके लिए नगरपालिका को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि चारों ओर गंदगी है। साफ सफाई और ब्लीचिंग पाउडर की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे कारण डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। राज्य में डेंगू के बढ़ते प्रकोप से अवगत कराते हुए प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए डेंगू नियंत्रण के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि राज्य में डेंगू ने महामारी का रूप ले पकड़ लिया है, लेकिन राज्य सरकार वास्तविकता को अब भी छिपा रही है। रोज हजारों लोग इस बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। अस्पतालों में इसकी चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी अस्पतालों में बेड के अभाव में मरीज को घर लौट जाना पड़ रहा है। डेंगू की जांच करने वाले कीट का काफी अभाव है।

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