मैनपुरी ने ओढ़ी कोहरे की चादर, हादसों से बचकर रहें

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश/ महबूब आलम: यूपी ने कल से धुंध की चादर ओढ़ ली है। बुधवार सुबह कोहरे के कारण एक्सप्रेस वे पर कई हादसे हुए और आज भी कोहरे की चादर चढ़ी हुई है। लेकिन ये केवल ठंड का कोहरा नहीं है, बल्कि ये प्रदूषण की धुंध है।शुक्रवार को मथुरा, आगरा में घना कोहरा था और इसकी वजह से कई हादसे हुए। कई लोग घायल हुए। कूड़ा जलाने से स्थिति भयावह हो सकती है। इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। कूड़े में प्लास्टिक होता है जिससे निकलने वाली गैस के कण भी वायुमंडल में ठहर से गए हैं। वहीं कई स्थानों पर टायर जलाए जाते हैं, यह भी खतरनाक है। रात में ठंड बढ़ेगी तो अलाव में प्लास्टिक और टायर जलाना खतरे की घंटी हो जाएगी। प्रदूषण की स्थिति तब और खराब हो जाती है जब कहीं भी ट्रैफिक रुकने लगता है। जहां भी जाम रहेगा, वहां वायु प्रदूषण बढ़ेगा और वायुमंडल की नमी में धुएं से निकलने वाले सारे कण बैठ जाएंगे। वहीं ट्रैफिक विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कानपुर शहर में सुबह साढ़े नौ बजे से साढ़े दस बजे तक सोमवार से शुक्रवार तक सबसे ज्यादा ट्रैफिक होता है। तब 8 से 9 लाख वाहनों का लोड होता है। शाम को साढ़े चार से सवा सात तक भी लगभग इतना ही लोड होता है। सड़कों पर जहां-तहां चल रही खुदाई प्रदूषण के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। कहीं भी सड़क खोदते वक्त मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा। एनजीटी के आदेशों की भी जमकर अवहेलना की जी रही है। जल निगम और केस्को ने शहर की सड़कों को जहां बर्बाद कर दिया है वहीं खुदाई से धूल पर नियंत्रण के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। कुलदीप मिश्रा कहते हैं कि खुदाई से धूल के कण वायुमंडल में फंसकर धुंध को बढ़ा रहे हैं। वे कहते हैं कि सड़कों के किनारे फुटपाथ बनाए जाने चाहिए नहीं तो प्रतिदिन उस पर पानी का छिड़काव करना चाहिए। वाहनों के साथ ही फुटपाथ की कच्ची मिट्टी भी हवा में उड़ रही है। फैक्ट्रियों से भी प्रदूषण हो रहा है।

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