मौजूदा हालात संबधित मंत्रालय को अवगत कराने वाले की अबतक रही कमी

सीवान, बिहार/संजय कुमारः महाराजगंज/ बड़े अरमान, सोच-समझ, महत्ता को जानकर ही इस जगह का नाम पड़ा महाराजगंज एक कहावत में महाराजगंज में कही जाती है, गंज में महाराजगंज और गंज गंजूली। इसलिए कि यहां की व्यवस्थाएं यहां का व्यापार यहां के लोग लोगों के प्रति मानवता व्यापार की अहमियत सबसे अच्छी रही होगी । चमचमाता हुआ महाराजगंज आखिर क्यूँ धीरे धीरे विकास पथ से भटक गया । महाराजगंज जिस प्रगति पर पूर्व में था वह आज धूमिल हो गया दुनिया लोक प्रगति कर गई हो परंतु महाराजगंज प्रगति नहीं कर पाया महाराजगंज से जीते हुए सांसद प्रधानमंत्री कब बने परंतु महाराजगंज एक छोटा सा शहर प्रधान शहर तक नहीं बना फांसी का है या ताजुब कहीं 12 वर्ष पहले पानी टंकी बना जो पूर्ण रुप से विकसित नहीं हुआ है दो दशक खराब पड़े हुए सड़क जब लोकसभा चुनाव आया तब एक प्रत्याशी बनवाए अभी भी शहर में एकमात्र पूर्व विधायक स्वर्गीय दामोदर सिंह के फंड से बना हुआ हाई मास्ट लाइट जलता है वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो पूर्व सांसद स्वर्गीय उमाशंकर सिंह के सौजन्य से इंडोर स्टेडियम बना जो आज भी उपेक्षा का शिकार है , चारों तरफ तो नहीं परंतु एक तरफ से नरकिय हालात हुआ है। इंण्डोर स्टेड़ियम के उपर का छत टुटा हुआ है। नगर पंचायत के देख रेख मे जिण्ड़ोद्धार करने का जिम्मदारी दी गई जो अभी तक नहीं बना है , वही हालात बिजली के मकरजाल तार लुंज-पुंज में अभी भी लगभग 50 से 60% हैं। दूसरी तरफ देखा जाए तो नगर पंचायत के पूर्व के 5 साल के कार्यों में जितने भी पीसीसी सड़क बने उसमें आधा से ज्यादा पीसीसी सड़क या तो टूट गए हैं या टूटने के कगार पर हैं कुछ तो ऐसे बने की बनने के 2 महीने के अंदर ही टूटने लगे । 14 वार्ड को मिलाकर नगर पंचायत का गठन किया गया आज भी किसी भी वार्ड में पूर्ण रुप से नाली का निर्माण नहीं हुआ है , जबकि नप गठन के बने लगभग दो दशक होने को है । महाराजगंज प्रखंड कार्यालय अंचल कार्यालय पर नजर डाला जाए तो जितने कर्मचारियों की आवश्यकता है उतने कर्मचारी प्रखंड कार्यालय और अंचल कार्यालय में मौजूद नहीं है नगर पंचायत में भी हालात वही हैं अनुमंडल अस्पताल हो या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जीवन जरूरियात जितने भी आवश्यक सामग्री या स्वास्थ्य केंद्र में टेक्नीशियन चाहिए वह आज भी मौजूद नहीं है ऐसी परिस्थिति में महाराजगंज को जिला बनाने की मांग अच्छी नहीं लग रही हैं पहले तो जितनी व्यवस्थाएं महाराजगंज में है वह पूर्ण रूप से कार्य नहीं कर रही है तो क्या जिला बन जाने के बाद पूर्ण हो जाएंगे। महाराजगंज जिला बनाओ संघर्ष समिति का भी गठन हुआ लगभग दो तीन दशक हो गए स्वतंत्रता सेनानी से लेकर शिक्षाविदों सामाजिक कार्यकर्ता हो या नवयुवकों की लंबी-चौड़ी फौज हो जिला बनाने की माँग पुरानी है। जिला बनाने की मांग बहुत पुरानी है महाराजगंज निवासी कुछ लोगों से जब इस बिंदु पर चर्चा किया गया तो लोगों का कहना था कि पहले महाराजगंज को जिन अति आवश्यक संसाधनों की जरूरत है पहले उसे पूरा किया जाए तक जिला गठन की मांग किया जाए उपरोक्त कुछ बिंदुओं पर चर्चा किया गया है उपरोक्त सभी समस्याओं का समूचित व्यवस्था कर लेने के पश्यचात ही जिला बनाने की मांग उचित नहीं लग रही है और किसी विकास के मुद्दे पर चर्चा नहीं किया जाए केवल एक छोटी समस्या है महाराजगंज की शहर में नाली की नाली के जल की निकासी जब संबंधित अधिकारियों से नहीं हो रही है और सामाजिक कार्यकर्ता नेता नवयुवक इस समस्या का समाधान नहीं करा सकते तो फिर जिला बनाने की मांग क्या पूर्ण हो सकती है मांग करना क्या उचित है। जिला बनाने की मांग हो या समस्या का समाधान हो मांगने वाले के तौर तरीके और देने वाले का नजरिया जब तक एक नहीं होगा तो ना जिला बनेगा ना समस्या सामाधान होगा। जब तीन दशकों से जिला बनाने का मांग खटाई में पड़ा है तो भला उपरोक्त बहुत सारी समस्याएं हैं यह भी खटाई मे ही फिलहाल दिख रही है। शहर में टैक्सी स्टैंड भी सड़क किनारे की भरोसे है,जब प्रशासन का डंडा चलता है तब दो चार दिन के लिए टैक्सी स्टैंड यत्र तत्र चला जाता हैं पुनः दो चार दिन बाद अपने पुराने सड़क किनारे स्टैण्ड पर चला आता है। शहर में एक भी होटल नहीं कि दुरदराज से आने जाने वाले ठहर सके,यात्री पड़ाव जहाँ बना वह स्वच्धता अभियान को मुहँ चिढ़ा रहा है। भोजनालय भी भगवान के ही भरोसे है। वहीं शहर के सड़कों की हालात भी बदतर कहाँ जाय तो अतिश्योक्ति नही होगी।बैंक चौक,काजी बाजार के तरफ,पसनौली बड़ी मस्जिद के तरफ, लगभग खराब है। शहर की बड़ी समस्या अतिक्रमण की है, अतिक्रमणकारियों द्वारा शहर के हरेक चौक चौराहा पर सड़क किनारे अतिक्रमण कर लेने जाम की समस्या आए दिन लगता है,सुधार नहीं हो रहा। महाराजगंज जिला बनाने की चर्चा जोडो पर हैं परन्तु महाराजगंज की वर्तमान समस्या का निदान निकालने की चर्चा नही हो रही हैं। इस समस्याओं को लेकर एनएचआरसीसीओ के ब्रजेश पाठक पीएमओ को पत्र वेजेगे,और सभी शहर वासी मिलकर लड़ेंगे,प्रो सुबोध सिंह,हरिशंकर प्रसाद,राजेश अनल,संतोष कुमार,अफतांब आलम, डॉ रामनारायन पाठक ,अमरेंद्र राठौर,सहित सैकड़ो बुद्विजीवी मौजूद रहे।

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