मप्र सरकार का बड़ा फैसला, दुष्कर्म से जन्मे बच्चे के लिए जरूरी नहीं होगा पिता का नाम

भोपाल, मध्यप्रदेश/नगर संवाददाताः दुष्कर्म से जन्मे बच्चे को स्कूल में प्रवेश के लिए पिता का नाम लिखवाना जरूरी नहीं होगा। मध्‍यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि दुष्कर्म की वजह से जन्म लेने वाले बच्चों के पिता का नाम यदि उसकी मां नहीं लिखवाना चाहती है या उसे पता नहीं है तो ऐसी स्थिति में बच्चे को स्कूल में प्रवेश देने से वंचित नहीं किया जा सकता। विभाग ने मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों पर यह फैसला लिया है। गौरतलब है कि पिछले साल डिंडौरी में एक मामला सामने आया था, जिसमें बच्चे के जन्म प्रमाण-पत्र में पिता के रूप में तीन व्यक्तियों के नाम लिखे होने से स्कूल ने प्रवेश देने से इन्कार कर दिया था। उस बच्चे की मां के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। बच्चे का जन्म होने पर पंचायत सचिव ने पिता के रूप में सामूहिक दुष्कर्म के तीनों आरोपियों का नाम लिखा था। वे तीनों ही व्यक्ति तीन साल की जेल काटने के बाद सुबूतों के अभाव में बरी हो गए थे। कलेक्टर को इस मामले की जांच सौंपी गई थी। स्कूल शिक्षा मंत्री ने डिंडौरी विकासखंड के रहंगी स्थित माध्यमिक स्कूल के प्रधान अध्यापक जेएल टेकाम को निलंबित करने के निर्देश दिए थे। वहीं बच्चे के जन्म प्रमाण-पत्र में पिता के रू प में तीन व्यक्तियों के नाम लिखने वाले पंचायत सचिव को भी बर्खास्त करने को कहा था। दुष्कर्म से जन्मे बच्चे के प्रवेश के लिए देश में यह अपनी तरह का पहला फैसला है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब तक किसी अन्य राज्य द्वारा ऐसा फैसला लिए जाने की जानकारी नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टर्स को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं और इसका कड़ाई से पालन करने को कहा है।

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