गोंडा की स्वामी नारायण छपिया घनश्याम महराज द्वारा दिया गया मानवता का संदेश

गोंड़ा, उत्तर प्रदेश/श्याम बाबूः भगवान् घनश्याम महाराज द्वारा  दिया गया मानवता का संदेश आज भी प्रासंगिक हैं।उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों कों समाप्त कर आम जन में जन जागृति पैदा की। यह जानकारी भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली स्वामिनारायण मंदिर छपिया के महंत ब्रम्हचारी  स्वामी वासुदेवानंद जी महराज ने मंदिर में प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि छपिया की माटी धन्य हैं कि भगवान ने यहां जन्म लिया। यहां अनेक लीलायें कर भक्तों को आसुरी शक्तियों के मुक्ति दिलायी।  महंत स्वामी ने बताया कि भगवान ने छपिया की भूमि में  जन्म तो लिया लेकिन कर्मभूमि गुजरात को बनाया। जहाँ रूणवादिता व अंधविश्वास अपने चरम पर था। भगवान् ने बाल विवाह, सती प्रथा, भ्रूण हत्या, दुर्व्यसन, कन्या वध, गरीबी, जाति-पात से लोगों को मुक्ति दिलाई।उन्होंने बताया कि छपिया में स्वामिनारायण सम्प्रदाय के आराध्यदेव भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली स्वामिनारायण मंदिर में 31 अक्टूबर से 4 नवम्बर तक पांच दिवसीय जन्म स्थान उद्घाटन  महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। महोत्सव में मुख्य मंत्री सहित अनेक मंत्री के आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय महोत्सव में अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान व अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड न्यूजीलैंड, कीनिया सहित दर्जनों देशों के हरिभक्त हिस्सा लेगें।छपैयाधीश बाल स्वरूप घनश्याम महराज के असीम अनुकम्पा से छपिया धाम जन्म स्थान उद्घाटन महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। नर नारायण देव पीठाधिपति प पू ध धू 1008 आचार्य कौशलेन्द्र प्रसाद जी महराज, प पू ध धू आचार्य मोटा महराज, प पू भावी आचार्य लाल जी महराज के सान्निध्य में कार्यक्रम सम्पन्न हो गा। मंदिर के निकट नरैचा गांव में करीब दो सौ से अधिक बीघा जमीन पर धर्मारण्य स्थल का निर्माण किया गया है। जिसमें यज्ञ स्थल, प्रवचन व  एस सी वी आई पी, व अन्य हरिभक्तों के रहने की व्यवस्था की गयी। उन्होंने बताया कि छपिया को पर्यटन का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। यहां ट्रेन, सड़क, बिजली, पानी, संचार जैसे बुनियादी सुविधाओं का सुचारू रूप व्यवस्था नहीं की गयी है। ब्रम्हचारी स्वामी हरिस्वरूपा नंद महाराज, कोठरी चिराग भाई, माधवराम तिवारी, शैलेन्द्र तिवारी, अयोध्या प्रसाद आदि रहे।

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