दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में नहीं हो पाएगी पटाखों की बिक्री

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के मौके पर इस बार आपको पटाखों का शोर शायद ही सुनाई दे। उसकी वजह है सुप्रीम कोर्ट की ओर से पटाखों की ब्रिकी पर पिछले साल लगाई गई पाबंदी को बरकरार रखना। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सभी स्थाई और अस्थायी पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से 31 अक्टूबर तक के लिए निलंबित करने का कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वो देखेंगे कि इस फैसले से दिवाली के बाद वायु प्रदूषण की क्या स्थिति रहती है। दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर राजीव सचान ने बताया कि वायु प्रदूषण के लिए किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं कि बड़ी तादाद में दिवाली के मौके पर पटाखे छोड़े जाते हैं जिनसे प्रदूषण होता है। लेकिन, प्रदूषण के बहुत सारे फैक्टर हैं जैसे- डीजल वाहन का चलना। इसके लिए दिल्ली सरकार ने ऑड ईवन भी लागू करके देखा था। उन्होंने बताया कि प्रदूषण सिर्फ दिल्ली की समस्या नहीं है बल्कि चेन्नई समेत सभी महानगरों की समस्या है। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध की जगह नियमन पर जोर देना चाहिए। उर्दू इनकलाब के संपादक शकील हसीन शमसी ने बताया कि प्रतिबंध पटाखे पर लगे हैं आतिशबाजी पर नहीं है। ऐसे में जिन पटाखों से ज्यादा शोर होता है उस पर बैन लगा है। उन्होंने बताया कि इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी। शमसी ने बताया कि सिर्फ दिल्ली में बैन लगाने से समस्या का हल नहीं होगा बल्कि सरकार को प्रदूषण रोकने के लिए कुछ अन्य कदमों पर विचार करना चाहिए। पिछले साल सबसे ज्यादा प्रदूषण पराली जलाने के बाद हुआ था ऐसे में सिर्फ दिवाली में इस पर रोक लगाने के बाद उसका कोई असर नहीं होगा। जबकि, राजीव सचान ने बताया कि पटाखों का जुड़ाव लाखों-करोड़ों बच्चों से होता है। इसलिए, सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अन्य मामलों में भी नियमन हुआ है वो चाहे बात दुर्गापूजा और दुर्गा विसर्जन की बात हो। राजीव सचान ने बताया कि उन पटाखा व्यापारियों का कोई दोष नहीं है जिन्होंने ऑर्डर दे दिए थे।

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