80 रुपए लीटर तक पहुंचा पेट्रोल, कांग्रेस ने कहा ‘आर्थिक आतंकवाद’

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में तेजी का मुद्दा गर्माता जा रहा है। बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने ब़़ढती कीमतों से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां दरें तय करती हैं, इसमें मंत्रालय या सरकार दखलंदाजी नहीं करती। जहां तक एक्साइज ड्यूटी घटाने का सवाल है तो फैसला वित्त मंत्रालय करेगा। राज्य अपने टैक्स कम करें। उधर, मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रपए लीटर तक पहुंच गई। कांग्रेस ने इसे ‘आर्थिक आतंकवाद’ करार दिया है। पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने कहा कि सरकार तेल विपणन कंपनियों के रोजमर्रा के काम में हस्तक्षेप नहीं करती है। पेट्रोल-डीजल अभी जीएसटी के दायरे में नहीं हैं। इनके दाम दूरी व राज्यों की कर दरों के अनुसार तय होते हैं। तेल दरों को युक्तिसंगत बनाने का एकमात्र रास्ता इन्हें जीएसटी के दायरे में लाना है। तेल उद्योग इसकी मांग कर रहा है और वित्त मंत्री अरण जेटली भी इसके इच्छुक हैं। दिल्ली व मुंबई की दरों में भारी अंतर है, यह स्थानीय करों के फर्क को स्पष्ट करता है। अमेरिका में उत्पादन 13 फीसदी घटा अमेरिका में हाल में आए तूफान इरमा व हार्वे के कारण तेल रिफाइनरियों में उत्पादन 13 फीसदी तक घट गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 18 से 20 फीसदी तक ब़़ढ गए हैं। भारत जहां से तेल आयात करता है वहां भी दाम पिछले हफ्ते 3.50 डॉलर प्रति बैरल तक ब़़ढ गए। अभी विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम 54 डॉलर प्रति बैरल है। निकट भविष्य में दाम घटने के आसार हैं। 2014 के स्तर पर पहुंचे दाम उधर, देश में रोजाना तय हो रहे पेट्रोल-डीजल के दाम सोमवार को अगस्त 2014 के स्तर पर पहुंच गए। मुंबई में पेट्रोल 79.41 रपए रहा। जबकि दिल्ली में 70.30, कोलकाता में 73.05 व चेन्नई में 72.87 फीसदी रहा। गुमराह कर रहे हैं मंत्री : कांग्रेस कांग्रेस नेता मनीषष तिवारी ने कहा, ‘पेट्रोलियम मंत्री आम जनता को गुमराह कर रहे हैं। कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से ज्यादा गिर गए, फिर भी तेल की कीमतें ज्यादा क्यों हैं? क्या ये आर्थिक आतंकवाद नहीं है?’

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