महाविद्यालय के प्राचार्य और शिक्षक की भूमिका और व्यवहार गुंण्डों जैसा

गोंड़ा, उत्तर प्रदेश/श्याम बाबूः गोण्डा शहर का एक मात्र महाविद्यालय जो हमेशा किसी ना किसी विवाद के कारण सुर्खियों में रहता है ताजा मामला इस समय चले प्रवेश फार्म जमा करने को लेकर रोज प्राचार्य और शिक्षक कम गुंडे रोज बवाल करने पर उतारू रहते हैं गाली गलोज, तेज आवाज में बात करना आम बात है जिसमें के.एन.पाण्डेय, राज बहादुर सिंह बाघेल मुख्य रूप से है। यह अपने प्रोफेशन से बिलकुल अलग व्यवहार करते हैं एक तो विघालय में किसी भी नियम कानून को नहीं माना जाता है यही कुछ लोग जो कहे वही पत्थर की लकीर होती है आज की बात ली जाये राजेश जो स्वयं शिक्षक है और आवास विकास में रहते वै अपना एक फार्म लेकर जमा करने गये वहाँ पर समय पूर्व ही कर्मचारी कार्यालय बन्द करके जा चुका था जबकी राजेश समय से 2 घंटे पहले गये थे जिसकी शिकायत प्राचार्य से करने तो उन्होंने बहाना बताया वहीं बैठे के.एन. पाण्डेय ने बत्मीजी से बात करने लगे और ऊपर धक्का देने लगे साथ ही जो गार्ड लगाये हैं उन्हें बुलाकर बाहर की तरफ धाकेल दिया और झगड़ा करने की कोशिश की। विघालय में शिक्षण कार्य के आलावा सब कार्य होते है नवम्बर तक प्रवेश होता है फरवरी में प्रेटिकल शुरू हो जाते हैं पढ़ाई के नाम पर मात्र कुल लगभग 90 दिन की पड़ाई बहुमुस्किल से होती है जिसमें जाड़े की छुट्टी के साथ रविवार और अन्य छुट्टियाँ शामिल है फिर आखिर सोचने वाली बात की अमुमन 55-60 दिन कु पड़ाई हो पाती है और वेतन लाखों रूपये महीना ले रहे तमाम शिक्षक। जानकारी यह भी पता चली है की इतने कम दिनों कघ भी पढ़ाई ना करवानी पड़े इसके लिए कुछ शिक्षकों ने टीचर भी कलग से रख रखा है। इससे यही पता चलता है की विघालय में कितनख भ्रष्टाचार है जिस पर कोघ अंकुश नहीं है। लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय गोंडा मे शिक्षक की गुडंई। जिस जगह को शिक्षा का मन्दिर कहा जाता है जहां ज्ञान का प्रवाह बहता है वहाँ का हाल वर्तमान समय मे भ्रष्ट हो चुका है घटना गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय की है जहां प्रवेश फार्म जमा होने का समय साढ़े चार बजे का है परन्तु ढाई बजे ही कैश गिनना और सब बहाने करके प्रवेश काउंटर बन्द कर दिया जाता है और बिना कुछ बताये प्रवेश आवेदन पत्र जमा करने के कर्मचारी उठकर चले जाते है।इस बाबत शिक्षक(पत्रकार) राजेश मिश्रा द्वारा पूछने पर महाविद्यालय के शिक्षक के .एन.पाण्डेय द्वारा पत्रकार को आफिस से धक्का देकर बाहर निकालने और सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा भगाने का मामला सामने आया है। इस सारे घटना क्रम पत्रकार का मोबाइल भी टूट गया। इस विषय मे महाविद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा ढुलमुल रवैया अपनाते हुए उन्होंने कहा कि महाविद्यालय मे छात्र संख्या बहुत ज्यादा है कर्मचारी परेशान हो जाते हैं।तो ऐसी घटना हो जाती है।प्रश्न यह उठता है कि क्या महाविद्यालय के शिक्षक का यह व्यवहार शिक्षक की मर्यादा के अनूकुल है। जब एक पत्रकार से यह व्यवहार है तो गांव और दूर से आये हुए अभिभावक और छात्रों से इनका व्यवहार कैसा होता होगा।

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