दिल्ली-आगरा समेत पांच हाईवे प्रोजेक्ट पर रक्षा जमीन का रोड़ा

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः रक्षा विभाग से जमीन मिलने में देरी के कारणउत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की चार सड़क परियोजनाएं तथा गुजरात की एक सड़क परियोजना पर काम अटका हुआ है। उत्तर प्रदेश की पहली परियोजना का संबंध राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (एनएच-2) पर महत्वपूर्ण दिल्ली-आगरा खंड से है, जिसके चौड़ीकरण (चार से छह लेन) पर 2012 में काम शुरू हुआ था। लेकिन झमेलों के कारण 2015 में पूरी होने वाला प्रोजेक्ट आज तक पूरा नहीं हुआ है। इस प्रोजेक्ट में मथुरा जिले के गांव दौलतपुर फरह के निकट रक्षा विभाग की 0.156 हेक्टेयर जमीन चौड़ीकरण में बाधक साबित हो रही है। रक्षा विभाग ने एनएचएआइ को जमीन हस्तांतरण की स्वीकृति भी दे दी है। लेकिन पैसों को लेकर जमीन का वास्तविक हस्तांतरण नहीं हो पा रहा है। रक्षा विभाग जमीन की कीमत के तौर पर 3.43 करोड़ रुपये की मांग कर रहा है। लेकिन इसे अत्यधिक बताते हुए एनएचएआइ अदायगी से इनकार कर रहा है। मामला फंसता देख केंद्रीय सड़क मंत्रालय को आगे आना पड़ा है। उसने रक्षा मंत्रालय से मामले को जल्द सुलटाने का अनुरोध किया है। दिल्ली-आगरा हाईवे का चौड़ीकरण परियोजना शुरू से ही विवादों का शिकार रही है। सड़क चौड़ी होने से पहले टोल की वसूली करने और फिर उसे दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट करने का मामला सुप्रीमकोर्ट तक जा चुका है। कुल 179.5 किमी लंबी और 1928 करोड़ रुपये लागत की परियोजना अब काफी महंगी हो चुकी है। इसकी पूर्णता तिथि को कई बार आगे बढ़ाया जा चुका है। दूसरा मामला एनएच-26 (नया नाम एनएच-44) पर झांसी-ललितपुर खंड का है। इसमें झांसी जिले के गांव बबीना मनकुआ के बीच रक्षा विभाग की महज ढाई हेक्टेयर जमीन के कारण काम अटका हुआ है। सड़क मंत्रालय ने बबीना छावनी तथा सेना के दक्षिणी कमान से एनएचएआइ को जमीन हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है। तीसरी परियोजना का संबंध हिमाचल प्रदेश में एनएच-22 (नया नाम एनएच-5) पर परवाणु-सोलन के बीच के हिस्से से है। यह प्रोजेक्ट डागसी छावनी की 12.23 एकड़ जमीन को लेकर अटकी हुई है। रक्षा विभाग एनएचएआइ को यह जमीन देने का तैयार है। बशर्ते वह पूर्व में अधिग्रहीत जमीन का पैसा बाजार दर के हिसाब से रक्षा विभाग को अदा करे। एनएचएआइ ने इससे पहले इसी सड़क को चौड़ी करने के लिए रक्षा विभाग की 9.156 एकड़ जमीन ली थी। लेकिन बाजार दर से पैसा नहीं दिया था। अब सड़क मंत्रालय ने हिमाचल के सार्वजनिक निर्माण सचिव से मामला सुलझाने का अनुरोध किया है। जमीन के इससे भी छोटे मामले हरियाणा में एनएच-73 पर साहा-बरवाला-पंचकुला सेक्शन तथा गुजरात में एनएच-8ए पर गांधीधाम-मुंदड़ा सेक्शन के हैं। इनमें रक्षा विभाग से 6.3 हेक्टेयर तथा 0.5 हेक्टेयर जमीन हस्तांतरित करने का अनुरोध किया गया है।

Share This Post

Post Comment