शरद यादव से पंगा क्या गिरा देगा नितीश की सरकार को ?

मुंबई, महाराष्ट्र/राजू सोनीः खबर है कि जदयू के 20 विधायक नीतीश कुमार के जोड़-तोड़ का गणितीय खेल बिगाड़ सकते हैं। बिहार को छोड़कर जदयू की अधिकांश राज्यों की इकाईयां बागी तेवर वाले शरद यादव के साथ हैं। जो ठीक समय पर शरद यादव के पक्ष में विधायक इस्तीफा देकर बिहार की नीतीश सरकार को गिरा देंगे। बीस महीने पुराने जेडीयू और आरजेड़ी गठबंधन को तोड़ कर हाईवोल्टेज ड्रामा,रहस्य रोमांच करने के बाद नीतीश ने जब भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाई, तभी से जेडीयू के संस्थापक नेता शरद यादव नाराज चल रहे थे। सूत्रों का कहना है कि शरद यादव को विश्वास में लिये बिना नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया। यही कारण है कि शरद यादव पहले दिन से ही इस मामले में नाराजगी जताते रहे हैं। इसके बाद वे अब नीतीश के फैसले को बिहार की जनता से विश्वासघात और वादाखिलाफी करार देते हुए ‘जनता से संवाद’ के नाम पर बिहार की सड़कों पर निकल पड़े हैं, जहां उन्हें बिहार की जनता का खासा समर्थन मिल रहा है। जदयू ने राज्यसभा सदस्य शरद यादव को 12 अगस्त को राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हटा दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उनकी जगह आरसीपी सिंह ने ली। दरअसल शरद यादव ने बिहार में भाजपा के साथ हाथ मिलाने के पार्टी के फैसले का विरोध किया था। लखनऊ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अरुण कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि शरद यादव ने 17 अगस्त को दिल्ली में गैर भाजपाई दलों के नेताओं के साथ अपने समर्थकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक के जरिए शरद यादव नीतीश को अपनी शक्ति का एहसास कराएंगे। शरद यादव ने जिस तरीके से अपनी ही सरकार के खिलाफ बिगुल फूंका है, उसका निहितार्थ केवल इतना भर है कि बिहार से नीतीश कुमार की सरकार की विदाई हो और राजद के साथ कोई सरकार बने। ऐसा नहीं होने पर दूसरा रास्ता बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव के रास्ते को अख्तियार करना हो सकता है। जिसके लिये लालू से लेकर।

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