चीन पर नजर, म्यांमार जाएंगे पीएम मोदी

चीन पर नजर, म्यांमार जाएंगे पीएम मोदी

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः पड़ोसी देश भूटान में चीन की बढ़ती ताकत को चुनौती देने के बाद भारत अब एक अन्य पड़ोसी देश म्यांमार में अपने कूटनीतिक दांव को लेकर ज्यादा गंभीर हो गया है। कुछ ही दिन पहले म्यांमार के सेना प्रमुख का जोरदार स्वागत करने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी सितंबर के पहले हफ्ते में म्यांमार जा रहे हैं। वैसे मोदी वहां आसियान बैठक में भी हिस्सा लेंगे लेकिन उनकी यह यात्रा भारत की लुक ईस्ट नीति के तहत एक अहम कदम भी साबित होगा। भारत ने पिछले दो वर्षो के दौरान म्यांमार में चीन के असर को काटने में काफी सफलता हासिल की है लेकिन मोदी जिस तरह से भारी भरकम एजेंडे के साथ वहां जा रहे हैं वह आने वाले दिनों में म्यांमार व भारत के द्विपक्षीय रिश्तो को नया मुकाम दे सकता है। मोदी ने अभी कुछ ही दिन पहले यह कहा था कि भारत की लुक ईस्ट नीति के लिहाज से म्यांमार काफी अहम है। उन्होंने म्यांमार के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को प्रगाढ़ करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई थी। उसके कुछ ही दिन बाद मोदी म्यांमार जा रहे हैं जिससे पता चलता है कि वह अपनी बात को लेकर गंभीर है। सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा के दौरान मोदी के एजेंडे में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ना सबसे अहम होगा। वैसे चीन ने म्यांमार में कारोबार से लेकर वहां सैन्य सहयोग तक के मामले में भारत से काफी आगे है लेकिन अब वहां की नई सरकार कुछ बदलाव के संकेत देने लगी है। पिछले महीने जब म्यांमार के कमांडर इन चीफ भारत आये थे तब उन्होंने सैन्य सहयोग पर चर्चा की थी। मोदी की यह यात्रा इस बारे में सहयोग को ठोस रूप देने का काम करेगी। सूत्रों के मुताबिक म्यांमार की नई सरकार ने पिछले दो वर्षो के दौरान भारत के साथ सहयोग को लेकर बहुत सकारात्मक रवैया दिखाया है। म्यांमार ने पूर्वोत्तर के आतंकियों का सफाया करने से लेकर सड़क व रेल नेटवर्क बनाने के भारतीय प्रस्ताव को खुल कर समर्थन दिया है। मेकांग-भारत इकोनोमिक कारीडोर प्रस्ताव को भी वह पूरा समर्थन करता है। लोकतंत्र के मजबूत होने के साथ वहां भारत की पैठ बनने के पूरे आसार हैं। जानकारों के मुताबिक म्यांमार में इस विचार के समर्थकों की संख्या बढ़ी है जो चीन पर अपनी निर्भरता के सख्त खिलाफ हैं। भारत के इस पड़ोसी देश के पास गैस का बहुत बड़ा भंडार है लेकिन अभी तक उसका दोहन चीन करता रहा है। भारत भी म्यांमार के गैस को क्रय करना चाहता है। मोदी की यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग के नये आयामों पर चर्चा होगी।

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