एक थी गुड़िया: जब पिता ने कहा- पता न था जानवर से भी बदतर होते हैं इंसान

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः ‘मैं अपनी बेटी को जंगली जानवरों से हमेशा सचेत रहने को कहा करता था। लेकिन मेरी बेटी कहती थी कि पापा आप नाहक परेशान होते हो। मुझे कोई परेशान नहीं कर सकता है। अच्छा हुआ होता कि मैंने अपनी बेटी को कहा होता कि तुम इंसानों से बचकर रहना, जो जंगली जानवरों से भी बदतर हैं।’ शब्दों के रूप में ये पीड़ा है उस बाप की जो अपनी बेटी की सलामती के लिए फिक्रमंद रहता था। अपनी बेटी के मुस्तकबिल के लिए अपनी सीमित आमदनी की परवाह किए बगैर बेहतर शिक्षा देना चाहता था। लेकिन हिमाचल की राजधानी शिमला से महज 50 किमी दूर जो कुछ उसकी बेटी के साथ हुआ वो निर्भया कांड की याद दिला देता है। बेशक दरिंदों की नापाक नजर उसकी बेटी को लग गई। लेकिन सवाल बहुत बड़ा है कि क्या ऐसे ही गुड़िया और निर्भया सुनसान सड़कों पर या दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर दरिंदों की शिकार बनेंगी और व्यवस्था बदरंग होती रहेगी। 16 साल की गुड़िया अब इस दुनिया में नहीं है। बस अब उसकी यादें हैं, जिसे याद कर उसके मां-बाप भावुक हो जाते हैं। अपने गांव हलैला से करीब पांच किमी की दूरी पर स्थित महसू के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में वो अपने भाई के साथ पढ़ने जाया करती थी। चार जुलाई 2017 का वो दिन उसकी जिंदगी का अंतिम दिन होगा शायद उसे पता नहीं था। स्कूल में उस दिन स्पोर्ट्स डे मनाया जा रहा था। गुड़िया का भाई स्पोर्ट्स डे में हिस्सा ले रहा था, लिहाजा गुड़िया ने अकेले घर जाने का फैसला किया। लेकिन उसे क्या पता था कि रास्ते में उसके लिए कुछ इंसान, जंगली जानवर साबित होंगे। गुड़िया के गुनहगारों ने उसका अपहरण किया, बेहोशी की दवा दी और फिर दुष्कर्म किया और गला घोंटकर मार दिया। राजधानी शिमला से महज 50 किमी दूर घटी इस हैवानियत की खबर से लोग आक्रोशित हो उठे और सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गया। जनता के दबाव के सामने पुलिस-प्रशासन से जुड़े लोग हरकत में आए और 6 आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया। लेकिन लोगों को जब पुलिस की जांच प्रक्रिया में झोल नजर आया तो राज्य सरकार ने पूरे मामले को सीबीआइ के हवाले कर दिया। इस बीच ये भी खबर है कि आरोपियों से एक की जेल में ही हत्या हो गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने ही अपने एक साथी को जान से मार दिया। मनोचिकित्सक डॉ परिनीता गौर ने कहा कि इस पूरे मामले को दो बिंदुओं पर देखने की जरूरत है। पहला,  ये कानून व्यवस्था का मामला है। सरकार की तरफ से जो भी फैसले किये गए हैं उससे लोगों को भरोसा नहीं हो पा रहा है। दूसरा, इस तरह के हादसे के बाद परिवार पूरी तरह बिखर जाता है। अपने किसी प्रिय को खोने के बाद मां-बाप खुद को समझा नहीं पाते हैं। वो अपने आप को हादसे के लिए जिम्मेदार मानना शुरू कर देते हैं। 13 जुलाई को पुलिस ने कहा कि इस मामले में कोटखाई के श्राल गांव के रहने वाले 29 वर्षीय आशीष चौहान को गिरफ्तार किया है। आशीष चौहान के पिता अपने इलाके के प्रभावशाली बागान मालिक हैं। उसी दिन एसआइटी ने कहा कि उसने छह लोगों की गिरफ्तारी की है, जिसमें मंडी का रहने वाले राजेंद्र सिंह ऊर्फ राजू (मुख्य आरोपी) भी शामिल है। राजू हलैला गांव में रहता है और एक सेब के बागान में मैनेजर-ड्राइवर का काम करता था। पुलिस का कहना है कि नाबालिग के साथ ये हादसा चार जुलाई को हुआ था, जब वो स्कूल से वापस घर आ रही थी। राजू ने उसे लिफ्ट देने के बहाने अपहरण किया। राजू के साथ चार और आरोपी सुभाष सिंह बिष्ट, दीपू (गढ़वाल, उत्तराखंड), सूरत सिंह और लोकजन नेपाल के रहने वाले थे। ये सभी उस गाड़ी में मौजूद थे। राजू समेत चार आरोपी सेब के बागान में काम करते हैं। महसू के स्कूल में दाखिले से पहले गुड़िया (हादसे के बाद लोगों ने पीड़ित लड़की की पहचान गुप्त रखने के लिए उसे गुड़िया नाम दिया) और उसका भाई अपने गांव हलैल से 6 किमी दूर जानहन के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ा करते थे। गुड़िया की बड़ी बहन का कहना है कि उन लोगों ने कभी भी इस इलाके में इस तरह की घटना के बारे में नहीं सुना था। लिहाजा ये समझ के बाहर था कि ये इलाका लड़कियों के लिए असुरक्षित होगा। गुड़िया की मां रोते हुए ये सवाल पूछ रही है कि क्या उसकी बेटी की चीख को किसी ने नहीं सुना। क्या लोग उस इलाके से नहीं गुजर रहे थे। उसकी बेटी के साथ जब वहशी दरिंदगी कर रहे थे तो उससे कुछ ही देर पहले महसू स्कूल के छात्र और एक शिक्षक उस रास्ते से गुजरा था। लेकिन कोई भी उसकी बेटी की चीख को नहीं सुन पाया। वो दावे के साथ कह सकती हैं कि पहले गुड़िया का अपहरण किया गया, बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म हुआ और अंत में दरिंदो ने हत्या कर शव को इस इलाके में फेंक दिया। अपनी बेटी के साथ हादसे के बाद उसके पिता ने कहा कि भगवान और गंगा मइया की कसम वो अपनी बेटी के गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। वो चाहते हैं कि गुनहगारों को फांसी की सजा मिले लेकिन पुलिस किसी निर्दोष को न फंसाए।

 

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