वियतनाम के हैकर्स ने आगरा के व्यापारी को लगाया 36 लाख का चूना

आगरा, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः वियतनाम के हैकर्स ने केमिकल कारोबारी और उनकी वियतनाम की पार्टी की ईमेल आइडी हैक कर अपने खाते में 36 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। हैकर्स को पकड़ने के लिए वियतनाम पुलिस के साथ इंटरपोल की मदद ली जा रही है। खंदारी के एमिनेंट अपार्टमेंट निवासी अनुज अग्रवाल का केमिकल्स का कारोबार है। वे वियतनाम की कंपनी से आयात करते हैं। ईमेल आइडी से वे ऑर्डर भेजते थे और वियतनाम की कंपनी पेमेंट संबंधी जानकारी भी मेल से देती थी। दो माह पहले वियतनाम के शातिरों ने अनुज अग्रवाल और उनकी पार्टी की ईमेल आइडी हैक कर ली। साइबर क्राइम की भाषा में इसे ‘मैन इन द मिडिल अटैक’ कहते हैं। दो माह तक वह दोनों के मेल का कम्युनिकेशन देखता रहा। इसके बाद हैकर्स ने दोनों की ईमेल आइडी से मिलती-जुलती दूसरी आइडी बना लीं। अनुज को उनकी वियतनाम की पार्टी की ओर से फेक मेल की। इसमें झांसा दिया कि हमारी कंपनी दूसरी कंपनी में मर्ज हो रही है, इसलिए खाता नंबर बदल गए हैं। अगले पेमेंट के लिए नए खाता नंबर भी दे दिए। अनुज ने 20 से 30 जून के बीच तीन बार में स्विफ्ट के माध्यम से उन खातों में 36 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। चूंकि स्विफ्ट से पेमेंट की प्रक्रिया पूरी होने में तीन दिन का समय लग जाता है, इसलिए हैकर्स ने वियतनाम की फर्म को मेल करके कह दिया कि भारत में जीएसटी के कारण पेमेंट करने में परेशानी आ रही है, इसलिए कुछ समय लग रहा है। सात जुलाई तक शातिर वियतनाम की फर्म को मेल करके गुमराह करते रहे। वियतनाम की फर्म ने 10 जुलाई को अनूप को वाट्सएप कर पेमेंट आने में देरी का कारण पूछा। साथ ही यह भी बताया कि वे मैटीरियल भेज चुके हैं लेकिन अभी तक पेमेंट प्राप्त नहीं हुआ। इस पर अनूप चौंक गए। उन्होंने मंगलवार को साइबर सेल में मामले की शिकायत की। साइबर सेल ने वियतनाम पुलिस से संपर्क की कोशिश की लेकिन वहां से खास मदद नहीं मिल पा रही है। आइजी मुथा अशोक जैन ने बताया कि साइबर शातिरों को पकड़ने के लिए अब इंटरपोल की मदद ली जाएगी।वियतनाम में भी हुआ मुकदमा: वियतनाम की फर्म को पहले तो अनूप अग्रवाल पर शक हुआ, मगर अनूप ने वाट्सएप पर पेमेंट आदि की डिटेल भेजी, तो फर्म को भरोसा हो गया। हैकर्स ने उनके साथ भी ठगी की थी, इसलिए इस मामले में हनोई में फर्म ने भी मुकदमा दर्ज करा दिया है। देर से जानकारी मिलने पर धन वापसी में मुश्किल: साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर शातिरों ने दोनों फर्मों से कम्युनीकेशन जारी रख उन्हें फंसाए रखा। इसके कारण उन्हें ठगी की जानकारी होने में देर हो गई। इसके चलते धन वापसी में परेशानी हो रही है। पिछले दिनों साइबर सेल ने इसी तरह एक्सपोर्टर से ठगी के मामले में इग्लैंड की बैंक से लाखों रुपये वापस कराए थे।

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