तीन माह तक एक पिता अपने इकलौते बेटे की तलाश में भटका दर-दर

उदयपुर, राजस्थान/यश जामड़ः तीन माह तक एक पिता अपने इकलौते बेटे की तलाश में दर-दर भटकता रहा, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। बेटे को ढूंढऩे के लिए पिता ने अपनी चार बीघा जमीन महज आठ हजार रुपए में गिरवी तक रख दी और एक बैल भी बेच दिया। बुधवार अलसुबह जब बेटा गुजरात से मेट के चंगुल से भागकर पिता से आ मिला तो पूरे परिवार की आंखों से आंसू छलक उठे। परिजनों को बच्चे दी गई यातनाओं की आपबीती सुनाई तो पिता बुधवार को ही झाड़ोल डीएसपी के सामने पेश हुआ और लिखित में शिकायत देते हुए आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बालक के अनुसार 20 से ज्यादा बच्चे अब भी गुजरात के खेतों में भूखे-प्यासे मजदूरी कर रहे हैं। पीपलबारा निवासी कालूलाल खोखरिया ने डीएसपी निरंजन प्रसाद चारण के सामने पेश होकर लिखित शिकायत में बताया कि करीब तीन माह पूर्व 20 अप्रैल 2017 को उसका ग्यारह वर्षीय पुत्र जगदीश सुबह सात बजे गांव में ही कपड़े सिलवाने गया था। लौटते समय जगदीश को आड़ी खजुर निवासी पपुड़ा पुत्र बदाराम पारगी मिला। पपुड़ा ने जगदीश को गुजरात के ईडर घुमाकर लाने का प्रस्ताव दिया। जगदीश के मना करने पर पपुड़ा ने उसे धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी और जबरन जीप में बिठाकर गुजरात के पाटन जिले के भाबर नामक गांव में हरजी भाई पटेल के पास खेतों में बाल मजदूरी के लिए छोड़ आया।  शिकायत के अनुसार हरजी भाई के बाजरे के खेतों में जगदीश सहित दो दर्जन अन्य छोटे बच्चे दिन-रात मजदूरी कर रहे हैं। बताया गया कि इन बच्चों को यहां पर दो दिन में एक बार ही खाने के लिए दिया जाता था। थकान व कम उम्र के कारण बच्चा यदि काम नहीं कर पाता तो उसके साथ मारपीट करते हुए यातनाएं दी जाती थीं। करीब तीन माह बाद पपुड़ा जगदीश को मंगलवार रात अपने घर लेकर आया, जहां से देर रात मौका देख जगदीश भाग आया और सीधा अपने घर पहुंचा। डीएसपी निरंजन चारण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फलासिया थानाधिकारी को मामले की जांच करने के साथ ही पीडि़त की ओर से बताए गए स्थान पर छापा मारने के निर्देश दिए। कैद से भागकर आए बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसके अलावा गुजरात के उस खेत में अब भी बीस से ज्यादा बच्चे मजदूरी कर रहे हैं। इसमें से ज्यादातर बच्चे झाड़ोल क्षेत्र के ही आदिवासी बच्चे हैं, जिनमें से तीन बच्चों को पीडि़त बच्चा पहचानता भी है।

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