तानाशाही के विरुद्ध जनता सड़कों पर

जामनगर, गुजरात/मयूर सिंहः देश में हर तरफ जीएसटी की चर्चा है, हर कोई गुणा गणित में जुटा हुआ है, लेकिन देश में एक प्रान्त ऐसा भी है जहाँ सरकारी तानाशाही के विरुद्ध जनता सड़कों पर है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान की जहाँ 24 जून की रात को पुलिस द्वारा एक व्यक्ति की हत्या कर दी जाती है, जिसे पुलिस द्वारा एनकाउंटर का नाम दिया जाता है। व्यक्ति राजस्थान पुलिस का हिस्ट्रीशीटर आनंदपाल सिंह था जो किसी भी कोर्ट द्वारा दोषी करार नहीं दिया गया था। हाँ सत्तासीन कुछ मंत्रियों और विधायकों के बड़े काम आया तथा उनका कई मामलों में राजदार भी था। पुलिस का कहना है की उन्होंने अमावस की रात में शीशे में देखकर सामने से AK47 से फायरिंग कर रहे आनंदपाल सिंह को ढेर कर दिया। बात ना जनता के पची और ना ही मृतक के परिजनों के। सरकार ने महज अपनी तानाशाही का प्रदर्शन इस मामले में किया तथा मानवता को सारी हदें पार करते हुए आनंदपाल सिंह को शरण देने वाले परिवार की महिलाओं छोटे बच्चों तक को जेल में डाल दिया तथा जेल में क्रूरता की सभी हदें पार की गई। परिजनों को लगातार धमकाया जा रहा है आनंदपाल सिंह के दाह संस्कार को लेकर। पूरा राजस्थान सुलग रहा है तथा आमजन की मांग है की सीबीआई जाँच इस मामले की करवाई जाये। सरकार लगातार जनता की भावनाओं के विरुद्ध षड्यंत्र पर षड्यंत्र रचे जा रही है तथा कोई भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय मिडिया इस मामले पर संज्ञान नहीं ले रहा है। अपराधी को मौत के घाट उतारने का अधिकार अगर पुलिस को दे दिया गया है तो फिर कोर्ट कचेहरी किस काम की? लोगों का कहना है की अपराध की सारी हदें पार करने वाले वाल्मीकि के जमाने में शासक वसुंधरा राजे होती तो शायद हमें रामायण पढ़ने को नहीं मिलती। जाति विशेष के विरुद्ध वसुंधरा राजे का ये तानाशाही रवैया आगामी सालों में बहुत भारी पड़ने वाला है।

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