मिल बैठकर सुलझाएं अयोध्या प्रकरण : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अच्छा होगा कि अयोध्या प्रकरण दोनों पक्ष मिलकर सुलझा लें। मुख्यमंत्री एक निजी चैनल के कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अगर दोनों पक्ष मिलकर प्रकरण को सुलझा लें तो दुनिया के सामने सांप्रदायिक सौहार्द की दृष्टि से इससे अच्छा काम नहीं हो सकता। पूरी दुनिया और आने वाली पीढिय़ों के लिए यह मिसाल होगी। देशहित के बारे में सोचेंगे तो आपसी सहमति बन जाएगी। निजी चैनल के कार्यक्रम में सवालों के जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर किसी को सौभाग्य नहीं प्राप्त होता कि उन पर राम की कृपा हो। इसी कारण पूर्व मुख्यमंत्री राम लला के दर्शन को नहीं गए। अयोध्या में ईंट और पत्थर लाए जाने की बाबत उन्होंने कहा कि वहां काफी पहले से पत्थर आ रहे हैं। वैसे भी कारसेवकपुरम की दूरी मंदिर से काफी ज्यादा है। एक प्रश्न पर उन्होंने फिर दोहराया कि ताजमहल एक अच्छी इमारत हो सकती है लेकिन, आस्था का प्रतीक नहीं हो सकती। रामायण और गीता से उसकी तुलना नहीं की जा सकती। इस प्रश्न पर कि आप फायर ब्रांड नेता माने जाते रहे हैं और अब सबको साथ लेकर चलने की बातें करते हैं। योगी ने कहा कि मेरी कार्यपद्धति से क्या यह लगता है कि मैं बदला हूं। पंद्रह वर्ष से सूबे में अवैध बूचडख़ाने चल रहे थे। एक योगी ही इस प्रकार के काम पर लगाम लगा सकता है। युवाओं की भर्तियां रुकी होने के संबंध में उनका कहना था कि पिछली सरकारों ने भर्ती में काफी गड़बडिय़ां की। सरकार डेढ़ लाख पदों पर जल्द ही भर्ती शुरू करने जा रही है। जुलाई-अगस्त से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कानून व्यवस्था के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब अपराधियों का आखिरी समय शुरू हो गया है। भूमाफियों के खिलाफ अभियान से सपा सरकार में कब्जा करने वालों में भूचाल आ जाएगा। सहारनपुर जातीय संघर्ष के लिए उन्होंने मायावती को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यदि कोई दंगा नहीं करेगा, तो बहुसंख्यक समाज उसे कुछ नहीं कहेगा। मुलायम सिंह यादव के प्रति मुलायम व अखिलेश के प्रति सख्त रुख पर उन्होंने कहा कि वस्तुत: हम समय जाया नहीं करना चाहते। बदले की राजनीति की बात उठाए जाने पर उन्होंने कहा हमने किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच नहीं शुरू की है लेकिन, किसी को अधिकार नहीं कि वह पद पर पहुंचकर उसका दुुरुपयोग करे। मुझे भी नहीं… मैं प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं, मालिक नहीं। उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट समेत कई योजनाओं की अनियमितता का उदाहरण देते हुए कहा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे तक का काम पूरा नहीं हुआ। सर्विस लेन अब तक नहीं बन सकी है। अखिलेश के गांव के पास ही इस सड़क पर आए दिन लूट व दुर्घटनाएं हो रही हैं। योगी ने कहा कि बिना तकनीकी के आप रेखा नहीं खींच सकते कि हमने ये-ये किया है। पश्चिम बंगाल में हिंसा पर योगी का कहना था कि तृणमूल सरकार की नकारात्मकता उस प्रदेश को जला रही है। वहां राजनीतिक अपरिपक्वता दिखाई दे रही है। क्या नीतीश कुमार को फिर से गठबंधन में आ जाना चाहिए, उनका कहना था कि राजनीति में यह एक उत्तम उदाहरण होगा। फिलहाल यह भाजपा और नीतीश को तय करना है।  हले अपनी स्वतंत्रता थी। दायरा सीमित था। सारे कार्यक्रम अपने हिसाब से संचालित करते थे। अब 22 करोड़ जनता और प्रदेश के हित में सारे कार्यक्रम निर्धारित होते हैं। पार्टी जहां से कहेगी, वहां से लड़ूंगा। प्रधानमंत्री के लिए मोदी से योग्य कोई नहीं। मेरी दिशा पूरब की ओर ही है। मैं गोरखपुर से लखनऊ लोगों की सेवा करने आया हूं। अंतत: मुझे गोरखपुर ही लौटना है। इस में सरकार सिर्फ कर्मचारियों का सीआर ही नहीं देखेगी या अफसर ने क्या रिपोर्ट दी है, मात्र यही नहीं देखा जाएगा। सरकार अन्य फीडबैक लेगी। आम लोगों का फीडबैक भी लेगी। क्या आपको ऐसा लगता है। यदि मेरे जैसा मुख्यमंत्री रबर स्टैंप लगता है तो हर जगह रबर स्टैंप मुख्यमंत्री होना चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अच्छा होगा कि अयोध्या प्रकरण दोनों पक्ष मिलकर सुलझा लें। मुख्यमंत्री एक निजी चैनल के कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अगर दोनों पक्ष मिलकर प्रकरण को सुलझा लें तो दुनिया के सामने सांप्रदायिक सौहार्द की दृष्टि से इससे अच्छा काम नहीं हो सकता। पूरी दुनिया और आने वाली पीढिय़ों के लिए यह मिसाल होगी। देशहित के बारे में सोचेंगे तो आपसी सहमति बन जाएगी।  निजी चैनल के कार्यक्रम में सवालों के जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर किसी को सौभाग्य नहीं प्राप्त होता कि उन पर राम की कृपा हो। इसी कारण पूर्व मुख्यमंत्री राम लला के दर्शन को नहीं गए। अयोध्या में ईंट और पत्थर लाए जाने की बाबत उन्होंने कहा कि वहां काफी पहले से पत्थर आ रहे हैं। वैसे भी कारसेवकपुरम की दूरी मंदिर से काफी ज्यादा है।  एक प्रश्न पर उन्होंने फिर दोहराया कि ताजमहल एक अच्छी इमारत हो सकती है लेकिन, आस्था का प्रतीक नहीं हो सकती। रामायण और गीता से उसकी तुलना नहीं की जा सकती। इस प्रश्न पर कि आप फायर ब्रांड नेता माने जाते रहे हैं और अब सबको साथ लेकर चलने की बातें करते हैं। योगी ने कहा कि मेरी कार्यपद्धति से क्या यह लगता है कि मैं बदला हूं। पंद्रह वर्ष से सूबे में अवैध बूचडख़ाने चल रहे थे। एक योगी ही इस प्रकार के काम पर लगाम लगा सकता है।  युवाओं की भर्तियां रुकी होने के संबंध में उनका कहना था कि पिछली सरकारों ने भर्ती में काफी गड़बडिय़ां की। सरकार डेढ़ लाख पदों पर जल्द ही भर्ती शुरू करने जा रही है। जुलाई-अगस्त से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कानून व्यवस्था के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब अपराधियों का आखिरी समय शुरू हो गया है। भूमाफियों के खिलाफ अभियान से सपा सरकार में कब्जा करने वालों में भूचाल आ जाएगा।  सहारनपुर जातीय संघर्ष के लिए उन्होंने मायावती को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यदि कोई दंगा नहीं करेगा, तो बहुसंख्यक समाज उसे कुछ नहीं कहेगा। मुलायम सिंह यादव के प्रति मुलायम व अखिलेश के प्रति सख्त रुख पर उन्होंने कहा कि वस्तुत: हम समय जाया नहीं करना चाहते। बदले की राजनीति की बात उठाए जाने पर उन्होंने कहा हमने किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच नहीं शुरू की है लेकिन, किसी को अधिकार नहीं कि वह पद पर पहुंचकर उसका दुुरुपयोग करे। मुझे भी नहीं… मैं प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं, मालिक नहीं।  उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट समेत कई योजनाओं की अनियमितता का उदाहरण देते हुए कहा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे तक का काम पूरा नहीं हुआ। सर्विस लेन अब तक नहीं बन सकी है। अखिलेश के गांव के पास ही इस सड़क पर आए दिन लूट व दुर्घटनाएं हो रही हैं। योगी ने कहा कि बिना तकनीकी के आप रेखा नहीं खींच सकते कि हमने ये-ये किया है।  पश्चिम बंगाल में हिंसा पर योगी का कहना था कि तृणमूल सरकार की नकारात्मकता उस प्रदेश को जला रही है। वहां राजनीतिक अपरिपक्वता दिखाई दे रही है। क्या नीतीश कुमार को फिर से गठबंधन में आ जाना चाहिए, उनका कहना था कि राजनीति में यह एक उत्तम उदाहरण होगा। फिलहाल यह भाजपा और नीतीश को तय करना है।  कुछ सवाल-जवाब -मुख्यमंत्री बनने का योगी पर क्या प्रभाव पड़ा पहले अपनी स्वतंत्रता थी। दायरा सीमित था। सारे कार्यक्रम अपने हिसाब से संचालित करते थे। अब 22 करोड़ जनता और प्रदेश के हित में सारे कार्यक्रम निर्धारित होते हैं। अभी चुनाव कहां से लड़ेंगे और क्या 2024 में प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे पार्टी जहां से कहेगी, वहां से लड़ूंगा। प्रधानमंत्री के लिए मोदी से योग्य कोई नहीं। मेरी दिशा पूरब की ओर ही है। मैं गोरखपुर से लखनऊ लोगों की सेवा करने आया हूं। अंतत: मुझे गोरखपुर ही लौटना है।  50 साल तक के सरकार कर्मियों का रिटायरमेंट इस में सरकार सिर्फ कर्मचारियों का सीआर ही नहीं देखेगी या अफसर ने क्या रिपोर्ट दी है, मात्र यही नहीं देखा जाएगा। सरकार अन्य फीडबैक लेगी। आम लोगों का फीडबैक भी लेगी। कहते हैं कि आप रबर स्टैंंप मुख्यमंत्री हैं? -क्या आपको ऐसा लगता है। यदि मेरे जैसा मुख्यमंत्री रबर स्टैंप लगता है तो हर जगह रबर स्टैंप मुख्यमंत्री होना चाहिए।

Share This Post

Post Comment