सदियों से आज तक मंदिर नहीं जा पाये हैं दलित वर्ग के लोग

ललितपुर, उत्तर प्रदेश/लखन तिवारीः ललितपुर थाना जाखलौन के चौकी धौर्रा के ग्राम कपासी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसको आज के सभ्य और विकसित समाज में कलंक के रूप में देखा जाना चाहिए। आजादी के 70 सालों के बाद सैकड़ों की संख्या में छुआछूत मिटाने सबको समान अधिकार देने के आंदोलनों के बाद भी ग्रामीण दलित वर्ग के लोग मंदिर जाने से आज भी वंचित हैं। और वही सत्तारुढ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उड़ीसा के दलित वर्ग के घर जाकर खाना खाने का ड्रामा कर रहे हो उसी दिन प्रदेश में उसी दल की सरकार होते हुए एक दलित को सिर्फ इसलिए मारा जाता है कि वह मंदिर में माथा टेकना चाहता था। यह बाक्या धोर्रा के पास गांव कपासी का है जहां पर एक रमेश अहिरवार नाम के युवक को कुछ दबंग यादव और पंडितों ने इस बात के लिए मारा की वह भगवान के दरबार में माथा टेकने जा रहा था। पिटने के बाद इसकी शिकायत लेकर पर चौकी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई और पुलिस को अपनी छबि बचाने लिये के उसको.दबाव में लेकर समझौता करा कर मामले का पटापेक्ष करना पडा। इहां तक की पीडित से ही स्वीकार कराया गया कि वह शराब पीये था जबकि उसकी पत्नी का कहना है कि उसका पति कभी शराब नहीं पीता घर के हालात और बूढी अन्धी मां और दो बच्चे का साथ और उसके घर का रहन-सहन इस बात का गवाही चीख चीख कर दे रहा है कि शायद वह शराब नहीं पीता है।लेकिन सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में एक दलित वर्ग के व्यक्ति को भगवान के दरबार में जाने से रोकना उसके साथ मारपीट करना सभ्य समाज के लिए एक कलंक है यह घटना यदि झूठी भी मान ली जाये तब भी वहां के शिक्षित युवा दलित वर्ग के लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर जाने से हमेशा रोका जाता है और वह कभी मंदिर नहीं गए। पुलिस प्रशासन भले ही इसे एक शराब के नशे की घटना मांनते हुए समझौता लिखा कर इस घटना का पटाक्षेप कर दे। पर यह घटना आज इस विकसित सभ्य समाज किसी कलंक से कम नही है।

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