दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टरों की कमी, प्रभावित हो रहा है कामकाज

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टरों की भारी कमी से थानों के दैनिक कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है। वर्तमान में दिल्ली के थानों में औसतन 8-15 सब इंस्पेक्टरों की तैनाती है। जबकि दिल्ली की जनसंख्या व लगातार बढ़ते अपराध को देखते हुए थानों में सब इंस्पेक्टरों की तैनाती औसतन 15 से 25 होनी चाहिए। सब इंस्पेक्टरों को ही थानों की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। उनपर ही थानों के तकरीबन हर बड़े मामले की तफ्तीश की जिम्मेदारी रहती है। मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस में वैसे तो कुछ बड़े रैंक को छोड़ अधिकतर रैंक के कर्मचारियों का टोटा है लेकिन सब इंस्पेक्टरों की भारी कमी से सीधे तौर पर केसों की तफ्तीश को लेकर बुरा असर पड़ता है। सब इंस्पेक्टर केवल उन्हीं मामलों की तफ्तीश कर पाते हैं जो बेहद जरूरी होता है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टरों के 7,523 पद स्कीकृत हैं। स्वीकृत पद में भी 2,535 सब इंस्पेक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं लेकिन उसे नहीं भरा जा रहा है। अभी वर्तमान में दिल्ली पुलिस में 4,988 पुरुष व 599 महिला सब इंस्पेक्टर हैं। अगर स्वीकृत पद के अनुसार भी दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टरोंकी तैनाती होती तब थानों के दैनिक कामकाज पर अधिक बुरा असर नहीं पड़ता। सब इंस्पेक्टरों की कमी के कारण एक सब इंस्पेक्टर के जिम्मे हमेशा 40-50 केसों के तफ्तीश की जिम्मेदारी रहती है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि केसों का निपटारा किस तरह किया जाता है। वाहन चोरी व अन्य छोटे मोटे मामलों में तफ्तीश ही नहीं की जाती है। दहेज हत्या, हत्या, भ्रष्टाचार व वेश्यावृत्ति के मामले में इंस्पेक्टर व एसीपी जांच अधिकारी होते हैं। इन चार मामलों को छोड़ दें तो अन्य सभी संगीन मामलों में जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टरों को ही बनाया जाता है। एएसआइ व अब हवलदार को भी चोरी व सड़क दुर्घटना आदि छोटे मोटे मामले में ही जांच अधिकारी बनाया जाता है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में स्मार्ट पुलिसिंग की जरूरत है। हर थाने के सभी डिवीजन में डिवीजन प्रभारी की जिम्मेदारी तेज तर्रार सब इंस्पेक्टरोंको दी जानी चाहिए। लेकिन सब इंस्पेक्टरोंकी कमी के कारण हर थाने में कुछ डिवीजन के प्रभारी एएसआइ को बनाया गया है। जिससे बीट सिस्टम भी कारगार नहीं हो पाता है। बीट में तैनात पुलिसकर्मी स्थानीय लोगों के साथ बेहतर समन्वय नहीं बना पाते हैं। एक अधिकारी की मानें तो एक समस्या यह भी है कि अगर किसी थाने में 15 सब इंस्पेक्टरों तैनाती है तो उनमें 10 ही बेहतर काम करने वाले हैं। कुछ सब इंस्पेक्टर गलत कामों में लगे रहते हैं। आए दिन ऐसे सब इंस्पेक्टर पकड़े जाते हैं।

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