जीएसटी की पेचीदगियों से बढ़ी हरियाणा के व्यापारियों की टेंशन

चंडीगढ़/नगर संवाददाताः वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की पेचीदगियों के खिलाफ व्यापारी संगठनों में आक्रोश बढऩे लगा है। पहली जुलाई से लागू हो रही नई कर व्यवस्था को लेकर 25 जून को प्रदेश भर के व्यापारी भिवानी की अनाज मंडी में जमा होंगे। राज्य स्तरीय व्यापारी प्रतिनिधि सम्मेलन में जीएसटी की खामियों पर मंथन कर इन्हें दूर कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। व्‍यापारी कई वस्‍तुअों पर भारी टैक्‍स और रिटर्न भरने की शर्त का विरोध कर रहे हैं। व्यापारियों को जीएसटी लागू होने के बाद कई तरह की दिक्कतों की चिंता सताए जा रही है। पांच तरह के टैक्स और कई प्रकार के सरचार्ज के अलावा कुछ वस्तुओं पर राज्यों को अलग से टैक्स लगाने का अधिकार दिया गया है। व्यापारियों को सबसे अधिक मुश्किल हर माह रिटर्न भरने की अनिवार्यता से है। पहले जहां तीन महीने में एक बार वैट की रिटर्न भरनी होती थी, वहीं अब उन्हें हर महीने में आइटम वार तीन रिटर्न भरनी होंगी। टैक्स भरने में देरी पर व्यापारियों को सजा का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा अनाज पर मार्केट फीस (मंडी टैक्स) लगाने का फैसला उनके गले नहीं उतर रहा। व्यापारियों का कहना है कि एक करोड़ रुपये का लेन-देन करने वाले लोगों को तीन महीने में रिटर्न भरने की सुविधा देनी चाहिए। अगर उन्हें महीने में रिटर्न भरनी पड़ी तो वे हिसाब-किताब रखने में ही उलझ जाएंगे। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को बाकी बचा स्टॉक 60 दिन में क्लीयर करना होगा जो खासा मुश्किल है। इसके लिए व्यापारियों को कम से कम छह महीने का समय चाहिए। इस स्टॉक पर वैट कर व्यापारी पहले ही दे चुके हैं। कपड़ा, साड़ी, चीनी और धूप सरीखी वस्तुओं पर जीएसटी का विरोध कर रहे व्यापारियों के मुताबिक आम उपयोग में आने वाली काफी वस्तुएं ऐसी हैैं जिन पर 28 फीसद तक टैक्स लगाया गया है जो कि अनुचित है। ” जीएसटी प्रणाली की खामियों और व्यापारियों की समस्याओं पर विचार करने के लिए व्यापार मंडल का प्रांतीय सम्मेलन भिवानी में बुलाया गया है। व्यापारियों को चोर समझने की मानसिकता सरकार को छोडऩी होगी। नई टैक्स प्रणाली को पूरी तरह से सरलीकरण कर लागू किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो व्यापारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन छेडऩे को मजबूर होंगे।

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