26 जून को होगी मोदी-ट्रंप की मुलाकात

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः 12 दिन बाद यानी 26 जून को अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात होगी। मोदी और ट्रंप की इस मुलाकात पर चीन की नजर भी रहेगी। इसकी बड़ी वजह भी है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप और मोदी के बीच तमाम मुद्दों के साथ इंडो पैसिफिक यानी हिंद प्रशांत इलाके पर भी चर्चा होगी। हिंद प्रशात वो समंदरी इलाका है जहां चीन अपनी दादागीरी जमाता रहा है। यानी मोदी ट्रंप मिलेंगे तो चीन की दादागीरी कम होगी। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका और सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के दोनों नेताओं की जब मुलाकात होगी तो चीन गुस्से से मचल रहा होगा। क्योंकि अमेरिका और भारत के बीच इस बार बातचीत का एक बड़ा मुद्दा एशिया में चीन की दादागीरी पर नकेल कसने का रहने वाला है। पीएम मोदी के तीन दिवसीय दौरे पर व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने साफ-साफ कहा कि हिंद प्रशांत महासागर का मुद्दा बातचीत में शामिल रहेगा। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सीन स्पाइसर के मुताबिक 26 जून को राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्हाइट हाउस में स्वागत करेंगे। दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत करने के लिए चर्चा होगी। आतंकवाद, अर्थव्यवस्था सहयोग, और हिंद प्रशांत इलाके में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर बात होगी। इस बयान का सीधा सा मतलब ये कि मोदी और ट्रंप के बीच ‘साउथ चाइना सी’ पर बात होगी। साउथ चाइना सी चीन की दादागिरी की वजह से सुर्खियों में रहा।

– साउथ चाइना सी दक्षिण पूर्वी एशियन देश चीन, ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम से घिरा समंदरी इलाका है।
– ये सारे देश इस इलाके पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं।
– इस इलाके पर दावा इसलिए क्योंकि यहां तेल और गैस के बड़े-बड़े भंडार दबे हुए हैं।
– अमेरिका साउथ चाइना सी पर कोई दावा तो नहीं करता है लेकिन उसके व्यापार का एक बड़ा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है।
-इसे लेकर अमेरिका और चीन में तनातनी बनी हुई है।

पूर्व राजनयिक एनएऩ झा के मुताबिक इस मुलाकात के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बारे में ज़रूर बातचीत होगी। चीन के ख़िलाफ़ ट्रम्प कोई ऐक्शन नहीं लेंगे इसीलिए उस बारे में बातचीत नहीं होगी।

चीन दुनिया के सामने खुद को भारत का दोस्त बताता है। लेकिन अरुणाचल और तिब्बत के मुद्दे पर आग उगलता रहता है और भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देकर दादागीरी जमाता है। हालांकि चीन की दादागीरी और बढ़ती ताकत पर अमेरिका की नजर है।

आपको बता दें कि ट्रंप राष्ट्रपति बनने के बाद जब चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से मिले थे। तो मुलाकात की जगह फ्लोरिडा में अपने घर को चुना था. क्या ये किसी खास रिश्ते की ओर इशारा करता है. क्योंकि मोदी और ट्रंप की मुलाकात ट्रंप के ऑफिस व्हाइट हाउस में होगी। एनएऩ झा की मानें तो इससे कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता कि मोदी से ट्रंप की मुलाक़ात व्हाइट हाउस में होती है या कहीं और ये बस सुविधा का मसला है। मोदी-ट्रंप की मुलाकात की तारीख और वक्त तय है। हालांकि व्हाइट हाउस ने ये नहीं बताया है कि पीएम मोदी का स्वागत कैसे होगा. जो भी हो हाल का इतिहास देखें तो मोदी ने हर देश के राष्ट्राध्यक्ष पर अपना जादू चलाया है। ट्रंप राज में जब ऐसा फिर होगा तो डैगन का जलना लाजिमी रहेगा। आपको बता दें कि ट्रंप राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार पीएम मोदी से मिलेंगे। अब तक मोदी और ट्रंप के बीच तीन बार फोन पर बात हो चुकी है।

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