दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, कामधेनु गौशाला को भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कामधेनु एवं गोपाल रत्न पुरस्कार दे कर सम्मानित किया गया

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, कामधेनु गौशाला को भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय कामधेनु एवं गोपाल रत्न पुरस्कार दे कर सम्मानित किया गया

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थापित कामधेनु गौशाला संवर्धन अनुसन्धान केंद्र को भारत सरकार ने 01 जून 2017 को भारत की सर्वश्रेष्ठ गौशाला के रूप में सम्मानित किया। ‘विश्व दुघ्ध दिवस’ के उपलक्ष में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह जी ने दिल्ली स्थित इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टिट्यूट, एक पी शि्ांदे संगोष्ठी हॉल, एन. ए. एस. सी. परिसर, पूसा, नई दिल्ली में किसानो को राष्ट्रीय गोपाल रत्न और संस्थानों को कामधेनु अवार्ड्स दिए। यह अवार्ड्स सरकार द्वारा इस वर्ष ही आरम्भ किए गए हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से यह सम्मान सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी चिन्मयानन्द जी एवं स्वामी विश्वानन्द जी ने स्वीकार किया। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का कामधेनु संरक्षण एवं संवर्धन अनुसन्धान केंद्र पुरे भारत में विशिष्ट प्रजातियों की उर्क्रिष्ट गुणों वाली गायों को विकसित करने और उनके संवर्धन के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रणालियों के उपयोग में अपनी अलग पहचान बना चुका है। कामधेनु गौशाला संवर्धन अनुसन्धान केंद्र की वैज्ञानिक प्रणाली और विश्व स्तरीय प्रबंधन को सीखने और जानने के लिए अन्य देशों से शोधकर्ता और कृषि व गौपालन के विद्यार्थी भी यहाँ आते हैं। कामधेनु देसी गायों के संरक्षण एवं संवर्धन में पिछले 10 सालों से काम कर रहा है। लगभग लुप्त हो गयी नस्ल साहिवाल को बचाने व उसके नस्ल सुधार में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की कामधेनु गौशाला का योगदान अद्वितीय माना जाता है। कामधेनु केंद्र के संयोजक स्वामी चिन्मयानन्द जी ने कहा कि, “यह स्थापित हो गया है कि गाय में भी वर्णसंकरता कई समस्याएं लाती है, इसलिए गौशाला में लगभग 25 गोत्र चलाए जा रहे हैं। हर गाय और सांड की वंशावली बनाई जाती है जिसका इस्तेमाल सेलेक्टिव ब्रीडिंग के लिए किया जाता है। कृत्रिम गर्भाधान, एर्म्ब्यो ट्रांसप्लांट टेक्नोलॉजी एवं आई वी एफ़ जैसी आधुनिक प्रणाली के प्रयोग से कामधेनु ने कम समय में उत्कृष्ट गुणों वाली दुधारू गायें अच्छी संख्या में विकसित की है।“ स्वामी चिन्मयानन्द जी ने यह भी बताया कि, “कामधेनु संरक्षण एवं संवर्धन अनुसन्धान केंद्र भारत की देसी नस्लों के कृषि व डेरी क्षेत्र में लाभ, उनके पालन व आर्थिक एवं पर्यावरण से जुड़े पक्षों पर प्रशिक्षण व जागरूक कार्यक्रम आयोजित करता है। कामधेनु केंद्र से प्रशिक्षण एवं प्रेरणा प्राप्त करके बहुत से किसानो ने देसी गौपालन शुरू किया है तथा उनको ।2 दूध का अच्छा खासा मूल्य भी मिल रहा है।“ सम्मान समारोह में संबोधन करते हुए स्वामी चिन्मयानन्द जी ने सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मान देश में देसी गोपाल को बढ़ावा देंगे और सरकार का यह कदम प्रशंसा के योग्य है। साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुझाव भी दिए कि सरकार को बाज़ार में नकली सीमेन की बिकरी पर रोकथाम के लिए जल्दी ही कदम उठाने चाहिए क्योंकि इससे गायों की ब्रीडिंग और नस्ल सुधार पर बुरा और गहरा प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि विदेशी नस्लों के सांडों का सीमेन बंद होना चाहिए और देसी नस्लों के उत्कृष्ट नस्ल के सांडों को बढावा मिले। उन्होंने ब्राज़ील से आने वाले गीर नस्ल के सांडों के सीमेन पर रोक लगाने के लिए भी तर्क दिए। ब्राज़ील वर्षों पहले गीर नस्ल को भारत से लेकर गया और क्रॉस ब्रीडिंग करके मिक्स गायों की नस्लों को पैदा किया। परिणाम स्वरूप अब वहाँ पर बहुत ही कम संख्या में विशुद्ध गीर नस्ल की गायों के फार्म हैं। गीर भारत की स्थानीय नस्ल है और ब्राज़ील से आने वाले सीमेन से क्रॉस ब्रीडिंग के कारण भारत की गीर की नस्ल बिगड़ सकती है।“ अपने संबोधन में स्वामी जी ने गौपालन के शोधकर्ताओं एवं गौपाल कों को संबोधित करते हुए कहा कि दूध उत्पादन के क्षेत्र में लम्बे समय से एक त्रुटी अभ्यास में लायी जा रही है जिसे ठीक करना अतिआवश्यक है। अक्सर सरकारी तंत्र में बछड़े को थन से दूध न पिलाकर बोतल से दूध पिलाते है जिससे प्रति गाय दूध के उत्पादन में कमी आती है और यही कम उत्पादन सरकारी रिकॉर्ड में आ जाता है। उन्होंने कुछ अनुसंधानों के हवाले से कहा की थन से दूध पिलाने पर प्रति गाय दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।“

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