चारधाम यात्रा में तंत्र के साथ भक्त भी दे रहा परीक्षा

रूद्रप्रयाग, उत्तराखंड/नगर संवाददाताः यात्रियों की बढ़ती तादाद के चलते केदारनाथ धाम और इसके पड़ावों पर सरकारी इंतजाम कम पड़ रहे हैं। हवाई सेवाओं से लेकर बायोमैट्रिक्स पंजीकरण तक के लिए यात्रियों को दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। मुख्य पड़ावों पर खान-पान और ठहरने के प्रबंधों को लेकर भी यात्रियों की टेंशन कम नहीं हो रही है। पड़ावों पर श्रद्धालुओं के खुले आसमान के नीचे रात काटने की शिकायतें आ रही हैं। यह दीगर बात है कि जिला प्रशासन अव्यवस्थाओं से इन्कार कर रहा है। मंदिर समिति के आंकड़ों के मुताबिक तीन मई को कपाट खुलने के बाद से अभी तक एक लाख 62 हजार श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। यहां पहुंचने वाले की संख्या हर दिन बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन की चुनौती और बढ़ने वाली है। केदारनाथ यात्रा के लिए सोनप्रयाग के अलावा फाटा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी व केदारनाथ में व्यवस्था बायोमैट्रिक्स पंजीकरण की व्यवस्था की गई है, लेकिन यात्रा के मुख्य पड़ाव सोनप्रयाग में अधिकांश यात्री पंजीकरण कराने पहुंच रहे हैं। पर्याप्त व्यवस्थाएं न होने से यहां यात्रियों को घंटों लाइनों में लगना पड़ रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए इस बार सरकार ने सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक के छह किलोमीटर के सफर के लिए शटल सेवा शुरू की है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में वाहन उपलब्ध नहीं हैं। रोटेशन भी सही तरीके से संचालित नहीं हो पा रहा है। पूर्व में सोनप्रयाग तक बड़े वाहनों को आने की अनुमति दी जा रही थी, लेकिन संख्या बढ़ने को देखते हुए बड़े वाहनों को सीतापुर में ही रोक दिया जा रहा है। यहां से यात्री ढ़ाई किमी पैदल चलकर सोनप्रयाग पहुंच रहे हैं। सोनप्रयाग में शटल सेवा के लिए लोगों को दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह कि सीतापुर से गौरीकुंड की आठ किमी की दूरी तय करने के लिए पांच घंटे से अधिक समय लग रहा है। फाटा से लेकर गौरीकुंड तक जाम की समस्या गहरा रही है। रोजाना औसतन तीन हजार से अधिक वाहन सोनप्रयाग व आस पास के क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। पार्किंग की व्यवस्था लगभग एक हजार वाहनों की ही है। ज्यादातर वाहन मुख्य हाईवे पर ही खड़े हो रहे हैं। त्रिजुगीनारायणमोटर मार्ग पर भी चार किमी तक सड़क किनारे वाहन खड़े रहते हैं। स्थिति यह कि सीतापुर, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, रामपुर, फाटा में पूरे दिन जाम की स्थिति बन रही है। यात्रियों की संख्या बढ़ने से घोड़े-खच्चर भी आसानी से नहीं मिल पा रहे हैं। वैसे तो प्रशासनिक दस्तावेजों में करीब चार हजार घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण है, लेकिन ये नाकाफी साबित हो रहे हैं। औसतन रोजाना दस हजार यात्री केदारनाथ जा रहे हैं। भीड़ बढ़ने से यात्रा के पड़ावों सोनप्रयाग, केदारनाथ, सीतापुर में यात्रियों को ठहरने की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही हैं। काफी संख्या में यात्री खुले आसमान या फिर होटल व लाँज के बरामदों मे ही रात बिता रहे हैं। रुद्रप्रयाग के जिलाधइकारी मंगेस घिल्डियाल के मुताबिक यात्रा पड़ावों पर व्यवस्थाएं सुधारने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। चूंकि यात्री काफी संख्या में पहुंच रहे हैं, इसे देखते हुए अधिकारियों को यात्रियों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि रात को कोई भी खुले आसमान के नीचे न रहने पाए।

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