पांचवें केदार तक पहुंचने में जान जोखिम में डाल रहे यात्री

चमोली, उत्तराखंड/नगर संवाददाताः पहले सरकार और अब लोक निर्माण विभाग विश्व बैंक डिविजन की लापरवाही उर्गम घाटी में स्थित पांचवें केदार कल्पेश्वर धाम की राह में रोड़ा बन रही है। कल्पेश्वर धाम को जोड़ने वाले पुल का निर्माण दो वर्ष बाद भी लोनिवि पूरा नहीं कर पाया है। ऐसे में यात्री जान जोखिम में डाल लकड़ी के कच्चे पुल से ही मंदिर पहुंच रहे हैं। सीमांत चमोली जिले में समुद्रतल से 2134 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कल्पेश्वर को शिव का परम धाम माना जाता है। कहते हैं कि स्वर्गारोहिणी यात्रा के दौरान भगवान शिव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने भैंसे का रूप धारण कर लिया, लेकिन पांडव उन्हें पहचान गए।  तब भगवान ने पांच अलग-अलग स्थानों पर उन्हें अलग-अलग अंगों के रूप में दर्शन दिए। कल्पेश्वर (कल्पनाथ) में भगवान ने पांडवों को कल्प अर्थात जटा रूप में दर्शन दिए थे। आज भी श्रद्धालु वहां इसी जटा रूपी चट्टान के दर्शन करते हैं। इस यात्रा सीजन में अब तक दो हजार से अधिक यात्री यहां दर्शनों को पहुंच चुके हैं। मुश्किल यह है कि कल्पेश्वर मंदिर के निकट कल्प गंगा पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हुआ है। इससे यात्रियों को जान जोखिम में डाल दर्शनों को पहुंचना पड़ रहा है। असल में कल्प गंगा पर पहले झूला पुल हुआ करता था, जो वर्ष 2013 की आपदा में बाढ़ की भेंट चढ़ गया। वर्ष 2015 में कल्प गंगा पर सात करोड़ की लागत से 120 मीटर लंबे स्पान पुल की स्वीकृति होने के बाद लोनिवि वल्र्ड बैंक को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। दो साल में लोनिवि सिर्फ एबेडमेंट ही तैयार कर पाया है। ऐसे में ग्रामीणों ने श्रमदान कर यहां लकड़ी का कच्चा पुल बनाया है। जिससे स्थानीय लोगों व स्कूली बच्चों के साथ यात्री भी आवाजाही कर रहे हैं। इस पुल की स्थिति ऐसी नहीं कि उसे सुरक्षित मान लिया जाए। नतीजा, साहसिक यात्री तो पुल पार कर जा रहे हैं, लेकिन बुजुर्ग व महिला यात्री नदी के इस छोर से ही भगवान कल्पेश्वर को हाथ जोड़कर वापस लौट जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण राजेंद्र सिंह नेगी बताते हैं कि पुल निर्माण का कार्य तेज करने की मांग कई बार निर्माण एजेंसी समेत प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं लोनिवि विश्व बैंक के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार भट्ट का दावा है कि पुल निर्माण में तेजी लाई गई है। एक वर्ष के भीतर पुल का निर्माण पूरा कर दिया जाएगा।

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