22 साल पुराने घोटाले में कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश, उनकी मां और पत्नी पर केस

रायपुर, छत्तीसगढ़/मयूर जैनः राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लू) ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के खिलाफ 22 साल पुराने जमीन आवंटन के मामले में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। भूपेश के अलावा उनकी मां और पत्नी को भी इस केस में आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही सालभर से चल रहे मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रदेश अध्यक्ष पर जोगी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 1995 में पद में रहते हुए साडा के मानसरोवर प्रोजेक्ट में नियमों के विरुद्ध 12 छोटे प्लॉट मिलाकर उन्हें दो बड़े प्लॉट में तब्दील किया। इसके बाद उन्होंने 8136 वर्गफीट जमीन का अावंटन अपनी पत्नी और मां के नाम पर करवा लिया। जोगी कांग्रेस की शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने मामले की जांच कराई। सोमवार को ईओडब्लू ने केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। ईओडब्लू के एसपी अरविंद कुजूर ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ जांच के बाद अपराध दर्ज करने लायक सबूत मिले हैं, इसीलिए केस रजिस्टर किया गया है। अब इसकी विवेचना की जाएगी। इसके बाद गिरफ्तारी तथा दूसरी औपचारिकताएं पूरी होंगी। गौरतलब है, भूपेश की शिकायत जोगी कांग्रेस के विधान मिश्रा ने 30 जनवरी को दस्तावेजों के साथ मुख्यमंत्री से की थी। इस शिकायत पर ईओडब्लू ने जांच की। इसी मामले में राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे इसी बीच 10 दिन पहले पूरे दस्तावेजों के साथ मिश्रा ईओडब्ल्यू एसपी से मिले और उनसे केस की जानकारी मांगी। इससे पहले आनंद साहू, भाजपा नेता विजय बघेल और वीरेंद्र पांडे ने भी शिकायत कर चुके हैं। इनकी शिकायत पर जिला प्रशासन ने करीब दो साल पहले तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच कराई। आरोप है कि गरीबों के लिए बनाए गए इस प्रोजेक्ट में प्लाट लेने के लिए पीसीसी चीफ की मां और पत्नी ने खुद को गरीब बताते हुए हलफनामा दिया है। झूठा हलफनामा पेश करने के लिए इस मामले में जालसाजी का आरोप भी दर्ज किया गया है। कांग्रेस प्रदेश में 10 हजार की जगह 12 हजार नुक्कड़ सभाएं करेगी और भाजपा के एक- एक कार्यकर्ता को बेनकाब करेगी जिसने पिछले साढ़े 13 सालों में कमीशनखोरी कर पैसा कमाया है। हम एक एक पंचायत में संपत्ति का ब्योरा मांगेंगे और शिकायतें करेंगे। उन्होंने कहा, अब कांग्रेस को रोकना संभव नहीं, रमन सिंह और उनके मित्र चाहे जो कर लें। ईओडब्लू के मुताबिक 1995 में पीसीसी चीफ साडा (भिलाई) के पदेन सदस्य थे। उसी दौरान मानसरोवर आवासीय योजना के तहत जमीन आवंटन की स्कीम आई। पीसीसी चीफ और उनके परिवार के सदस्यों को बड़े प्लॉट की जरूरत थी, जबकि वहां 6 बाई 9 और 12 बाई 9 के ही प्लॉट थे। ऐसे में 6 बाई 9 के तीन और 12 बाई 9 के तीन प्लॉट को एक बनाकर उसे पीसीसी चीफ की मां के नाम पर आवंटित किया गया। इसी तरह दसरा प्लॉट इसी साइज का बनाकर उसे उनकी पत्नी के नाम पर आवंटित किया गया। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में शिकायत सही पाए जाने के बाद शासन की ओर से मामला दर्ज करवाया गया है। केस दर्ज होने के बाद बघेल ने कांग्रेस भवन में मीडिया से कहा कि सवाल उनके मकान और जमीन का है ही नहीं। पीसीसी चीफ ने कहा कि वे पूछ रहे हैं कि अजीत जोगी की जाति कौन सी है, वे फर्जी प्रमाण पत्र से आदिवासी क्यों बने हुए हैं? अंतागढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी की खरीद-फरोख्त का आपराधिक खेल उन्होंने क्यों खेला? उनके बेटे के तीन जन्म प्रमाणपत्र में से कौन सा असली है? मेरे इन्हीं सवालों के जवाब में यह केस दर्ज किया गया है। यह रमन और जोगी की मित्रता का परिणाम है। जोगी की पार्टी की मजबूरी है कि मुझ पर झूठे आरोप लगाते रहें क्योंकि इसी में वे प्रासंगिक बने रह सकते हैं। जहां तक मुख्यमंत्री रमन सिंह का सवाल है तो वे कांग्रेस के लगातार आंदोलन से झुंझलाए हुए हैं। वे समझते हैं कि प्रदेश भर में 10000 नुक्कड़ सभाएं होंगी तो इसका मतलब क्या है और इसका जनता के बीच क्या संदेश जाएगा, वे चाहते हैं कि मुझे लेकर वे जोगी के जरिए विवाद खड़ा कर दें तो कांग्रेस का आंदोलन धीमा पड़ जाएगा।

 

Share This Post

Post Comment