आयकर विभाग ने तैयार की भ्रष्ट अधिकारियों की कुंडली, जल्द पड़ेंगे छापे

रायपुर, छत्तीसगढ़/मयूर जैनः आयकर विभाग ने बेनामी तरीके से संपति की खरीदी करने वाले 500 लोगों का डाटा तैयार कर लिया है। इसमें ब्यूरोक्रेट से लेकर राजनीतिक, उद्योगपति और कारोबारियों के नाम शामिल है। ब्लैकमनी खपाने के लिए राजधानी रायपुर से लेकर ग्रामीण इलाकों में जमीन से लेकर थोक के भाव कृषि जमीनें खरीदी गई थी। जिसे चिन्हित करने के बाद दस्तावेजी खानापूर्ति पूरी कर ली गई है। साक्ष्य जुटाने के बाद विभागीय टीम कार्रवाई शुरू करने की कवायद में जुटा हुआ है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के बाद सारी तैयारियां कर ली गई है। टीम का गठन होते ही छापेमारी का काम शुरू किया जाएगा। आयकर विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मई के अंत तक विभागीय टीम अपना काम करेगी। नोटबंदी के दौरान ब्लैकमनी खपाने के लिए करोड़ों रुपए जमीन में निवेश किया गया था। पकड़े जाने के डर से किसी दूसरे के नाम से ट्रांजेक्शन कर उन्हें दस्तावेजों में जमीन का मालिक बनाया गया। वित्तीय वर्ष की समाप्ती के बाद छापेमारी और सर्वे करने की योजना बनाई गई थी। लेकिन, केंद्र सरकार ने बेनामी संपति एक्ट में संशोधन करने के बाद विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया था। बताया जाता है कि बेनामी संपति की खरीदी करने वालों की आयकर विभाग ने पहले ही रिपोर्ट तैयार कर ली है। बेनामी संपति की जांच करने के लिए तीन सदस्यी विशेष टीम गठित करने के लिए आयकर विभाग को स्वीकृति मिल चुकी है। इस टीम में एक संयुक्त आयकर आयुक्त, एक सहायक आयुक्त और एक आयकर अधिकारी और दो सहायक होंगे। यह टीम आयकर महानिदेशक के निर्देशन में सीधे कार्यवाही करेगी। गौरतलब है कि संपति की खरीदी करने के बाद उसे आयकर रिटर्न में नहीं दर्शाने पर भी उसे बेनामी संपति माना जाएगा। किसी भी तरह का संदेह होने पर संबंधित व्यक्ति को तलब कर सीधे पूछताछ की जा सकती है। 90 दिन के भीतर जवाब नहीं देने और गड़बड़ी मिलने पर नए कानून के तहत बेनामी संपति का लेनदेन करने पर 3 से 7 साल तक के सजा का प्रावधान है।

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