आरटीआई में बड़ा खुलासा, देश के आठ प्रदेशों में एक भी पंजीकृत बूचड़खाना नहीं

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः  एक अनुमान के मुताबिक देशभर में करीब 30 हजार से ज्यादा गैर पंजीकृत बूचड़खाने संचालित हैं। लेकिन हाल ही में आरटीआई से चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। भारत में कुल 1707 बूचड़खाने ही खांद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत। दिलचस्प बात ये है कि अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ प्रदेशों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है। सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़खाने वाले सूबों की फेहरिस्त में क्रमश: तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष तीन स्थानों पर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मध्य प्रदेश के नीमच कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को आरटीआई से प्राप्त सूचना जारी की। ये आंकड़े फूड लायसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिये उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा, “आरटीआई के तहत मुहैया कराये गये इन आंकड़ों की रोशनी में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में कितनी बड़ी तादाद में अवैध बूचड़खाने चल रहे हैं।” एफएसएसएआई ने आरटीआई के तहत बताया कि तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत रजिस्टर्ड हैं। उत्तरप्रदेश में 58 बूचड़खाने पंजीकृत हैं, जहां अवैध पशुवधशालाओं के खिलाफ नवगठित योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्रवाई चर्चा में है। गौड़ की आरटीआई अर्जी पर भेजे जवाब में एफएसएसएआई के एक अफसर ने बताया कि अरणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा, नगर हवेली, दमन और दीव, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में एक भी बूचड़खाना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत रजिस्टर्ड नहीं है।इस बीच पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया की विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश में अवैध या गैर लाइसेंसी बूचड़खानों की संख्या 30,000 से ज्यादा है। हालांकि, कई लाइसेंसशुदा बूचड़खानों में भी पशुओं को बेहद क्रूरतापूर्वक जान से मारा जाता है। पेटा इंडिया ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे बूचड़खानों को बंद कराएं जिनके पास उपयुक्त अथॉरिटीस के लाइसेंस नहीं हैं। और जो कानून का गलत तरीकों का इस्तेमाल करती हैं।

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