मुस्लिम महिलाएं हिंदू धर्म स्वीकार करें, हम न्याय दिलाएंगेः हिंदू महासभा

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः तीन तलाक मुद्दे पर हिंदू महासभा की अोर जारी बयान से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। महासभा ने मुस्लिम महिलाअों से कहा कि हिंदू धर्म स्वीकार करें, अापको न्याय मिलेगा। हिंदू महासभा की महासचिव डॉ. पूजा शकुन पांडे ने अागरा में कहा कि तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम महिलाएं हिंदू धर्म अपनाएं, उन्हें न्याय मिलेगा। मुस्लिम नारी उत्थान यज्ञ में शामिल डॉ. पांडे ने कहा कि अगर हमारी सरकार और कानून आपको न्याय नहीं दिला सकती तो हम अाप न्याय दिलाएंगे। इस मौके पर उपस्थित हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताअों ने तीन तलाक से लड़ने की शपथ ली। उसने कहा कि हिन्दू महासभा ऐसी सभी महिलाओं को अपनी बेटियों के रूप में मानती है और उनसे आत्म सम्मान रक्षा करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एेसी महिलाअों की शादी का अायोजन भी महासभा की अोर से किया जाएगा अौर हम लोग कन्यादान करेंगे। इससे मुस्लिम महिलाअों को एक सुरक्षित जीवन मिलेगा। डॉ. पांडेय के बयान से अखिल भारतीय मुस्लिम महिला बोर्ड की अध्य़क्ष शेरिन मसरुर ने असहमति जताते हुए कहा कि शादी के लिए धर्मांतरण सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में अार कुछ करना चाहते हैं, तो मुस्लिम महिलाअों को शिक्षित करना, उनके मनोबल को बढ़ावा देना चाहिए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना चाहिए। इससे तीन तलाक के मुद्दे का समाधान हो सकता है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता मारिया आलम ने कहा कि पहले हिन्दू धर्म में दहेज, स्त्री भेदभाव और महिलाओं के शारीरिक उत्पीड़न को समाप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम तीन तलाक के खिलाफ लड़ रहे हैं और जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। एक तरफ देश में तीन तलाक को लेकर बहस का दौर जारी है तो, दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं की ओर से विरोध के स्वर तेजी से मुखर हो रहे हैं। हाल में उप्र के बागपत जिले में कोर्ट मैरिज करने वाली मुस्लिम युवती ने धर्म परिवर्तन की वजह तीन तलाक बतायी थी। अब बुलंदशहर की महिला ने एलान कर दिया है कि तलाक वापस नहीं लिया गया तो परिजनों समेत हिंदू धर्म अपना लेगी। चोला चौकी क्षेत्र के एक गांव निवासी सबा (काल्पनिक नाम) का निकाह 2012 में अलीगढ़ जिले के एक गांव निवासी नदीम (काल्पनिक नाम) से हुआ था। सबा के पिता ने बताया कि उन्होंने जमीन बेचकर शादी में 30 लाख रुपये खर्च किए थे। लेकिन ससुराल वाले दहेज के लिए उत्पीड़न करने लगे। बेटी का भविष्य बर्बाद न हो, मजबूरी में 10 लाख रुपये और दे दिए। लेकिन उत्पीड़न बंद नहीं हुआ। आरोप है कि ससुराल वालों ने डेढ़ साल पहले सबा को मायके में छोड़ दिया। दामाद की दूसरी शादी की बात की भनक लगने पर गत 11 अप्रैल को वह बेटी को लेकर पहुंचे तो ससुरालियों ने मकान का गेट बंद कर लिया और दामाद ने छत से ही तीन बार तलाक बोल दिया। इस दौरान समाज के किसी व्यक्ति ने उनकी मदद नहीं की। दूसरे समुदाय के लोगों की मदद से हम घर लौटे। तीन तलाक मिलने के बाद वर्षो से न्याय के लिए भटक रहीं दो मुस्लिम महिलाओं ने गुरुवार को अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यालय में संपन्न हुए हवन में न केवल आहुतियां दीं, बल्कि तीन तलाक के खिलाफ आवाज और ज्यादा बुलंद करने का संकल्प भी लिया। हलाला को महिलाओं के आत्मसम्मान की हत्या बताते हुए कहा कि इसमें जबर्दस्त शोषण होता है। उसके बाद भी गारंटी नहीं कि हलाला से निकली महिला का पति उसे स्वीकार कर ही ले। महासभा के स्थापना दिवस पर नारी उत्थान कार्यक्रम में महंत डॉ. पूजा शकुन पांडेय के नेतृत्व में हवन किया गया। यहां धौर्रामाफी की फैजा व टप्पल की सलमा भी मायके वालों के साथ पहुंचीं। तलाक पीडि़त दोनों महिलाओं ने हवन में आहुतियां दीं। फैजा ने बताया कि उन्हें 17 साल पहले तीन तलाक दिया गया था। तीन बेटियों का किसी तरह पालन कर रही हैं। टप्पल की सलमा ने बताया कि तलाक के बाद मायके वालों ने भी साथ छोड़ दिया। दो बेटियों के साथ वह संघर्ष कर रही है। तीन तलाक पर पाबंदी लगनी चाहिए। डॉ. पूजा शकुन पांडेय ने कहा कि तलाक पीडि़त मुस्लिम महिलाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है तो वे धर्म परिवर्तन करें, उन्हें पूरा संरक्षण व सुरक्षा दी जाएगी। फैजा व सलमा के परिजनों ने कहा कि उनके समाज ने अगर उनकी मदद की होती, उन्हें यहां नहीं आना पड़ता। गुरुवार को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यक्रम में मंच के संयोजक मोहम्मद अफजाल ने मुसलमानों से अपील की कि उन्हें मुखर होकर तीन तलाक का बहिष्कार करना चाहिए। इससे इतर वंदेमातरम, गोरक्षा व शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर समाज में जनजागरण अभियान चलाया जाना आवश्यक है। राष्ट्रीय सह संयोजक इस्लाम अब्बास ने कहा कि इस्लाम में तीन तलाक की इजाजत ही नहीं है।

Share This Post

Post Comment