8 नवंबर के बाद स्वाइप मशीनों की संख्या में 10 लाख की बढ़ोतरी

मुंबई, महाराष्ट्र/नगर संवाददाताः 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से कार्ड के जरिए भुगतान को स्‍वीकार करने वाले दुकानों की संख्‍या अब 15 से 25 लाख हो गयी है। एसबीआई के अनुसार, डिजिटाइजेशन के स्‍तर को बढ़ाते हुए इकोनॉमी में करेंसी नोटों की जरूरत 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो जाएगी। नोटबंदी से पहले, अक्‍टूबर 2016 तक 15.1 लाख क्रेडिट कार्ड स्‍वाइप मशीन थे जो इस साल फरवरी में 22.2 लाख पहुंच गयी। नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, नोटबंदी के बाद से स्‍वाइप मशीन की संख्‍या 25 लाख के पार पहुंच गयी है। इनमें से आधे एसबीआई, एक्‍सिस, एचडीएफसी बैंक, कार्पोरेशन बैंक और आइसीआइसीआइ बैंक के हैं। एसबीआइ ने चार माह में 1.24 लाख मशीनों और एचडीएफसी व एक्‍सिस में से प्रत्‍येक ने 1.18 लाख मशीनों को जोड़ा। कार्पोरेशन बैंक ने 80,822 और आइसीआइसीआइ बैंक ने अपने नेटवर्क को 67,000 तक बढ़ते देखा है। एसबीआई के प्रमुख अर्थशास्‍त्री, सौम्‍य कांति घोष ने बताया, आरबीआई द्वारा हाल में जारी डाटा के अनुसार डिजिटल पेमेंट में तेजी से बढ़त हुई है। इस डिजिटल पेमेंट के अंतर्गत, नोटबंदी के बाद एक दिन में 5,476 पीओएस मशीनों को लगाए जाने का काम होने लगा, डेबिट कार्ड में वृद्धि हुई और मोबाइल ट्रांजैक्शन में इजाफा हुआ। बैंकों ने सितंबर 2018 तक इलेक्‍ट्रॉनिक पेमेंट नेटवर्क वाले 30 लाख दुकानों की स्‍थापना का निर्णय लिया। इसमें 10 लाख अतिरिक्‍त पीओएस मशीनें, 10 लाख आधार के जरिए भुगतान व क्‍यूआर कोड के जरिए भुगतान स्‍वीकार करने वाले 10 लाख आउटलेट की स्‍थापना का निर्णय लिया।

 

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