पुराने नोट जमा करने के लिए और मौका नहीं दिया जा सकता – सरकार

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः  सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा में साफ कर दिया है कि 500 और 1000 के पुराने नोटों को बैंक में जमा करने के लिए और मौका नहीं दिया जा सकता। सरकार ने कहा है कि 30 दिसंबर 2016 की समयसीमा नहीं बढ़ाई जा सकती। सरकार ने ये हलफनामा तीन लोगों और एक कंपनी की ओर से पुराने नोट जमा करने के लिए समयसीमा बढ़ाने की मांग याचिका का जवाब देते हुए दाखिल किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 8 नवंबर 2016 की नोट बंदी की अधिसूचना में 30 दिसंबर के बाद भी नोट जमा कराने की सुविधा देने की बात की गई थी। उन्होंने अधिसूचना के पैराग्राफ 2 के नवें बिन्दु का हवाला दिया था जिसमें कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति 30 दिसंबर तक पुराने नोट बैंक में जमा करने या बदलने में असफल रहता है तो उसे रिजर्व बैंक के कुछ आफिसों मे नोट जमा करने का मौका दिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के निदेशक गौरव मसाल्दन के जरिए दाखिल किये गये हलफनामे में सरकार ने कहा है कि 8 नवंबर की अधिसूचना के मुताबिक नोट बंदी की अवधि 9 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच की थी। इस दौरान हर व्यक्ति को 500 और 1000 के पुराने नोट तय नियमों के मुताबिक बैंक में जमा करने व बदलने की छूट थी। समयसीमा 30 दिसंबर तक थी। सरकार ने कहा है कि पैराग्राफ 2 के नवें बिन्दु में कही गई बात किसी भी व्यक्ति को 30 दिसंबर के बाद नोट जमा करने का अधिकार नहीं देती। वो सिर्फ सरकार को नोट बंदी के बाद आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उचित कदम उठाने का अधिकार देती है। अध्यादेश मे ये साफ तौर पर कहा गया था कि इस पर किसी कानून या आरबीआई एक्ट का प्रभाव नहीं होगा। उसमें सिर्फ देश के बाहर रहने वाले भारतीयों को कुछ शर्तो के साथ छूट दी गई थी। सरकार ने कहा है कि अध्यादेश अब कानून की शक्ल ले चुका है। तय तारीख के बाद अब पुराने नोट रखना दंडनीय अपराध है। सरकार ने कहा है कि उसने सोच समझ कर यह फैसला किया है कि कानूनी या तथ्यात्मक रूप से पुराने नोट जमा करने की अवधि बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।

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