योगी सरकार का तोहफा : माफ होगा बिजली बकाएदारों का सरचार्ज

लखनऊ, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः पहली कैबिनेट बैठक में कर्ज में डूबे प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत देने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार अब बिजली के बकाएदारों पर मेहरबानी की तैयारी में है। योगी राज में प्रदेश में बिजली के सभी बकाएदारों के अच्छे दिन आने वाले हैं। प्रदेश सरकार की पहल पर पावर कारपोरेशन प्रबंधन ऐसी योजना लागू करने जा रहा है, जिसमें बकाएदारों को सिर्फ बिजली का मूल बकाया बिल ही अदा करना होगा। उन्हें सरचार्ज बिल्कुल नहीं अदा करना पड़ेगा। दरअसल, बकाएदारों ने तकरीबन 19 हजार करोड़ रुपये बिजली के बिल का दबा रखा है। गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे कारपोरेशन प्रबंधन की तमाम कोशिशों के बावजूद बकाए की वसूली नहीं हो पा रही है। चूंकि इधर, योगी सरकार किसी न किसी तरह से समाज के सभी वर्गों को राहत देना चाहती है इसलिए किसानों की कर्ज माफी के बाद अब बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने की तैयारी है। ऐसे में उच्च स्तरीय निर्देश पर कारपोरेशन प्रबंधन ने सरचार्ज माफ करने के संबंध में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल किया है। ‘डिलेड पेमेंट सरचार्ज ऐमिनेस्टी स्कीम’ नाम से दाखिल प्रस्ताव के जरिए कारपोरेशन प्रबंधन ने आयोग से ग्रामीण व शहरी घरेलू के साथ ही कृषि, वाणिज्यिक, लघु उद्योग आदि सभी श्रेणियों (भारी उद्योग वाली श्रेणी छोड़) के बकाएदार विद्युत उपभोक्ताओं का शत-प्रतिशत सरचार्ज माफ करने की अनुमति मांगी है। अब किसानों को तो बकाया मूल बिल, किस्तों में भी अदा करने की सुविधा देने का प्रस्ताव है।आयोग के अध्यक्ष देशदीपक वर्मा ने बताया प्रस्ताव पर विचार करने से पहले कारपोरेशन प्रबंधन से ग्रामीण, शहरी, मीटर्ड, अनमीटर्ड  बकाएदार उपभोक्ता, कुल बकाए में मूल बिल व सरचार्ज का अलग-अलग ब्योरा मांगा है। वर्मा ने बताया कि पूरा ब्योरा आने के बाद प्रस्ताव पर फैसला करेंगे। हालांकि, उन्होंंने स्पष्ट कहा कि सरचार्ज माफ होने का असर, समय से बिल अदा करने वाले ईमानदार विद्युत उपभोक्ताओं पर नहीं पडऩे दिया जाएगा। कारपोरेशन के अफसरों का कहना है कि सरचार्ज माफ करने के लिए फिलहाल सरकार से धनराशि की मांग नहीं की जा रही है। ऐसे में आयोग की भले ही कोशिश रहे कि सरचार्ज माफ होने का असर  अन्य उपभोक्ताओं पर न पड़े लेकिन भरपाई के लिए अंतत: बिजली ही महंगी हो सकती है। समय से बिजली का बिल न अदा करने पर दो फीसद तक लेट सरचार्ज (विलंब अभिभार) लगता है। विद्युत उपभोक्ताओं को पहले तीन माह तक जहां 1.25 फीसद लेट सरचार्ज देना होता है वहीं उसके बाद उनसे बकाए बिल पर दो फीसद की दर से लेट सरचार्ज वसूला जाता है। दो वर्ष पहले 7 जून को नियामक आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि समय से बिल न जमा करने वालों के लिए बिजली कंपनियों द्वारा समय-समय पर लागू की जाने वाली ओटीएस योजना को आयोग ने अब खत्म करने का फैसला किया है, क्योंकि इससे समय पर बिल अदा करने वाले उपभोक्ता हतोत्साहित होते हैं और वे अपने को ठगा सा महसूस करते हैं। वर्मा ने साफ कहा था कि यदि कंपनियां अपने स्तर से इसे लागू करती हैं तो उन्हें योजना से नुकसान की भरपाई खुद करनी होगी। अन्य उपभोक्ताओं को उसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा। माना जा रहा है कि आयोग के इस रुख पर ही कारपोरेशन प्रबंधन अब ओटीएस तो नहीं लेकिन सभी बकाएदारों को राहत देने के लिए कुछ वैसी ही योजना प्रस्तावित की है।वैसे तो किसानों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को लागू करने को पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने पिछले वर्ष विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल की थी लेकिन आयोग ने अनुमति देने से पहले प्रबंधन से प्रस्ताव पर स्पष्टीकरण तलब कर लिया था। गौर करने की बात यह है कि जवाब देने के बजाय प्रबंधन ने चुनावी साल होने के नाते सरकार के दबाव में अपने स्तर से ही योजना लागू कर दी थी ताकि किसानों को राहत देकर खुश किया जा सके।

 

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