गेहूं की सरकारी खरीद में पहली बार यूपी तोड़ सकता है सारे रिकॉर्ड

लखनऊ, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः गेहूं की सरकारी खरीद में पहली बार उत्तर प्रदेश सारे रिकार्ड तोड़ सकता है। राज्य की नई सरकार ने किसानों से उनकी उपज की सीधी खरीद करने का फैसला लिया है। राज्य एजेंसियों को इसके लिए पहले ही सतर्क कर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश के लिए मात्र 30 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन राज्य सरकार ने अपना खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 80 लाख टन कर दिया है। इसमें 10 लाख टन एफसीआई और बाकी 70 लाख टन राज्य एजेंसियां करेंगी। एक अप्रैल से खरीद सीजन चालू हो चुका जबकि यूपी में सरकारी खरीद 15 अप्रैल से तेज हो सकेगी। मुख्यमंत्री पद संभालने के साथ ही योगी आदित्यनाथ ने कृषि उपज की खरीद के लिए छत्तीसगढ़ की रमन सरकार और मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की खरीद प्रणाली को अपनाने की बात कही थी। उसी तर्ज पर रबी खरीद सीजन में गेहूं की अधिक से अधिक खरीद करने का फैसला किया गया है। एफसीआई को इसकी तैयारियों के बावत इत्तला भेज दी गई है। राज्य में आमतौर पर 20 से 30 लाख टन गेहूं की खरीद होती रही है, जो इस बार 80 लाख टन तक हो सकती है। गेहूं की कुल पैदावार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 फीसद होने के बावजूद सूबे में सरकारी खरीद बहुत कम है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। पंजाब व हरियाणा के किसानों के समृद्ध होने के पीछे उनकी उपज की उचित मूल्य पर बिक्री होती है। उनकी देखा-देखी मध्य प्रदेश में गेहूं व छत्तीसगढ़ में धान की पूरी खरीद होती है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सांसदों और विधायकों को गेहूं की सरकारी खरीद की निगरानी करने को कहा है ताकि बिचौलियों की धांधली से किसानों को बचाया जा सके। चालू रबी खरीद सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल है। किसानों को उपज का मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराया जाएगा जो आधार नंबर से जुड़े होंगे। गेहूं की सरकारी खरीद में पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश का प्रदर्शन उम्दा रहता है। केंद्रीय पूल के लिए होने वाली इस खरीद में चालू सीजन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी भी शानदार रह सकती है।

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