आसमान से बरस रही आग, तापमान 42 के पार

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः चिलचिलाती गर्मी से लोगों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। जैसे-जैसे मई का महीना नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे गर्मी भी लगातार बढ़ती जा रही है। आसमान से बरस रही आग के कारण देश के कई राज्यों के लोग बेबस है। कई इलाकों में तापमान सामान्य से भी ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य गर्म हवाओं की चपेट में हैं। मौसम विभाग की माने तो आने वाले दिनों में गर्मी और झुलसाएगी। तेलंगाना मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री अधिक करीब 43 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। वहीं आंध्र प्रदेश मौसम विभाग ने भी राज्य के कई इलाकों मे तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका जता है। देश की राजधानी दिल्ली में बीते कुछ दिनों से यहां तापमान के बढ़ने का सिलसिला जारी है। तेज धूप की वजह से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। न्यूनतम तापमान बढ़कर 23.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जो कि सीजन के औसत तापमान से पांच पायदान ऊपर है। पहाड़ों में भी चढ़ते पारे ने लोगों की मुसीबते बढ़ी दी हैं। आलम यह है कि मैदानों से ज्यादा पहाड़ तमातमा रहे हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तापमान 35.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बीते 17 साल में मार्च में यह सर्वाधिक तापमान है। वहीं रुद्रप्रयाग का तापमान हरिद्वार की बराबरी कर रहा है। दोनों स्थानों पर अधिकतम तापमान 37 डिग्री रहा। इस साल मार्च महीने में पहली बार गया जिले का अधिकतम तापमान गुरुवार को 41 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। गर्मी के मौसम के शुरूआती दौर में अचानक अधिकतम तापमान में वृद्धि से लोग परेशान दिखे। देखा जाए तो इस सप्ताह सोमवार को अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री व न्यूनतम 18.7 था। मंगलवार को अधिकतम 37.5 व न्यूनतम 19.6 डिग्री रहा। लेकिन बुधवार को बढ़कर अधिकतम तापमान 39.1 व न्यूनतम 21.2 डिसे पहुंच गया। गुरुवार को अधिकतम तापमान में अपेक्षाकृत वृद्धि हुई। दिल्ली-एनसीआर में दिन का तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस के नजदीक पहुंच चुका है। दोपहर में गर्मी झुलसाने लगी है। मार्च अभी खत्म नहीं हुआ है और गर्म हवा भी चलने लगी है। देश के ज्यादातर राज्य तप रहे हैं। बढ़ती गर्मी ने जिंदगी को झुलसाना शुरू कर दिया है। कुछ राज्यों में गर्मी से बचाव को लेकर अलर्ट भी जारी किया जा चुका है। मौसम की यह लीला देख-सुनकर लोगों का चकित होना का अकारण नहीं है। पहला सवाल जो उन्हें मथता है, वो कि मार्च के अंतिम सप्ताह से ही इतना तापमान कैसे हो गया। सामान्य मौसम वाला चैत जेठ कैसे बन गया? इस गर्मी की अनियमितता भी उन्हें चौंकाती है। दिन भर तेज गर्मी, लेकिन हवा में वह गर्माहट नहीं दिखती। मौसम की इस माया को आम इंसान तो नहीं समझ सकता लेकिन मौसम विज्ञानी इसका मर्म समझ रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग, पुणे के वैज्ञानिक डीएस पई के मुताबिक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में बड़े क्षेत्र पर उच्च वायुदाब का क्षेत्र बन गया है जिसके चलते अत्यधिक गर्मी की दशाएं बन गई हैं। इस दाब क्षेत्र से बादल बनने के हालात नहीं बन रहे हैं जिससे सूर्य की तेज किरणें सीधे धरती को झुलसा रही हैं। दूसरी तरफ कुछ विज्ञानी इसे एंटी-साइक्लोन और जलवायु परिवर्तन से भी जोड़कर देख रहे हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटरियोलॉजी के मौसम वैज्ञानिक जीवन प्रकाश कुलकर्णी के मुताबिक एंटी-साइक्लोन की वजह से मार्च में ही गर्मी पड़ने लगी। आमतौर पर गुजरात और राजस्थान में एंटी-साइक्लोन अप्रैल के महीने में बनते हैं। अब की बार ये समय से पहले बन गए। अब इन एंटी साइक्लोनों ने पूरे देश को अपने लपेटे में ले लिया है। जिसका प्रतिकूल असर सभी जगह बढ़ती गर्मी और लू के रूप में दिख रहा है। सामान्यरूप से अप्रैल के महीने में जब तापमान में वृद्धि होती है तो इसे संतुलित करने के लिए तेज हवाओं के साथ बारिश हो जाती है। मार्च के महीने में ही एंटी साइक्लोन का बनना सामान्य नहीं है। जलवायु परिवर्तन के चलते ऐसा हो रहा है। इस साल हमने असमय-अनियमित बारिश देखी थी, अब गर्मी भी देख रहे हैं। मौसम चक्र अनियमित हो रहा है। यदि औसत तापमान का आंकड़ा देखा जाए तो तापमान में इतनी वृद्धि पहले नहीं दिखती। यह सब जलवायु परिवर्तन का प्रतिफल है। जलवायु परिवर्तन के स्थानीय असर अब दिखने लगे हैं। देश में बढ़ती गर्मी के बीच भी दिल्ली एनसीआर के इलाकों में बहने वाली हवा में मौजूद ठंड की वजह भी वैज्ञानिक बताते हैं। भारतीय मौसम विभाग लखनऊ के मौसम विज्ञानी जगदीश प्रसाद गुप्ता बहने वाली हवा में पर्याप्त नमी को इसका कारण मानते हैं।

 

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