ग्रीष्म ऋतु के मौसम का प्रभाव ज्यादा होने के आसार

मुंबई, महाराष्ट्र/राजेंद्र कांगने : भारतीय मौसम विभाग के अनुसार संन 2017 में, ग्रीष्म ऋतु के मौसम का प्रभाव ज्यादा होने के आसार है। इस ऋतु में सूरज की तेज किरणों से मनुष्य ही नहीं बल्कि सभी जीव-जंतु, वनस्पतियां, नदी, तालाब, कुएं आदि प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। पिछले साल के मुताबिक इस साल जल्द गर्मी के शुरूआत होने के वजह किसी भी प्रकार के जीवित हानि न हो उसके सरल उपाय योजना करें। गर्मी के चलते शारीरिक तान से मृत्यू होने के शक्यता ज्यादा होती है। खासकर अप्रैल, मई एवं जून की गर्मी व्यक्ति को अधिक व्यथित करती है जिससे बचने के उपाय हमें करना अतिआवश्यक है। आइए आप और हम निम्न उपायों को अपना कर काफी हद तक गर्मी की दस्तक से बच सकते हैं।
क्या उपाय योजना करें |
1) प्रातः जल्दी उठकर ताजी वायु का सेवन अवश्य करें।
2) प्यास लगे या न लगे ज्यादा से ज्यादा पानी पी ले। पानी पीने में कोताई नहीं बरतें।
3) गर्मी के मौसम में हल्के सूती वस्त्र ही पहनें, क्योंकि सूती वस्त्र पसीना सोखने में कारगर होते हैं। जहां तक हो सके, ठंडे पानी से ही स्नान करें।
4)तेज धूप से बचाव करके ही घर से निकलें। विशेष कर सिर एवं त्वचा को किसी भी तरह से बचाएं। इसके लिए टोपी, स्कॉर्फ या ग्लव्स या गमछे का प्रयोग करें।
5)सूर्य की तेज धूप से आंखों को बचाने के लिए गहरे रंग के या सनग्लास चश्मों का प्रयोग हितकर होगा। अच्छी किस्म का सन्सक्रीन लोशन भी अवश्य प्रयोग में लाएं। टोपी, बूट, चप्पल आदि का वापर करें।
6)सफर करते समय पानी के बोतल साथ रखे।
7) धुप में काम करने वाले व्यक्ति टोपी, छाता या ठन्डे पानी के कपडे से सर ढके।
8) शरीर में पानी के मात्रा कम होने के अवसर पर ओआरयस, घर पर बनी लस्सी, नींबू पानी, छास आदि का नियमित सेवन करें।
9)गर्मी में सूरज अपनी प्रखर किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है,इसलिए गर्मी में मधुर(मीठा) ,शीतल (ठंडा) , द्रव तथा इस्निग्धा खान-पान हितकर होता है।
10)गर्मी में जब भी घर से निकले ,कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले ,खाली पेट नहीं
11) सर दर्द, बार बार पसीना आने पर डॉक्टर के सलाह ले।
12)गर्मी में जब भी घर से निकले ,कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले ,खाली पेट नहीं
13)प्याज का सेवन तथा जेब में प्याज रखना चाहिये|
14) बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये ठंडा मतलब आम(केरी) का पना, खस, चन्दन गुलाब फालसा संतरा का सरबत, ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी, मट्ठा, गुलकंद का सेवन करना चाहिये इनके अलावा लोकी, ककड़ी, खीरा, तोरे, पालक, पुदीना, नीबू, तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये।
15) पालतू जानवर को छावनी में रखे, उनके खाने पिने के व्यवस्था करें। उन्हें बंद कार या घर पर न रखें।
16) पंखा, गिला कपड़ा, ठंडा पानी का ज्यादा सेवन करें।
17) सूरज के किरण से बचने के लिए मजदूरों को सूचित करें।
18) धुप में काम करते समय बिच बिच में आराम करें।
19) जगह जगह पाणपोई के सुविधा उपलब्ध करें।
क्या ना करें।
1)दोपहर 13 से 3.30 के समय धुप में काम न करें।
2) गहरे रंग के कपडे न पहने।
3) बाहर ज्यादा धुप होने पर शारीरक कामकाज बंद करें।

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