किसानों की आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः देशभर में किसानों की आत्महत्या के मामले बदस्तूर जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। सरकार को निर्देश जारी कर कोर्ट ने  कहा है कि वो चार हफ्तो में इस मसले पर कार्रवाई करते हुए विस्तृत जवाब के साथ एक रोड मैप तैयार करे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए केंद्र को इस संबंध में रोडमैप तैयार करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश जे.एस. खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सिर्फ मरने वाले किसान के परिवार को मुआवजा देना काफी नहीं है। आत्महत्या की वजहों को पहचानना और उनका हल निकालना जरूरी है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया था। एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि ये समस्या दशकों से चली आ रही है, लेकिन अभी तक इसकी वजहों से निपटने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और न ही कोई कार्यकारी योजना तैयार की गई है। हालांकि केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा कि उम्मीद है कि 2015 की फसल बीमा योजना से आत्महत्या के मामलों में बड़ी कमी आई है। दरअसल, देश के तमाम राज्यों में किसान फसलों की बर्बादी और कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करने को मजबूर है। यहां यह उल्लेखनीय है कि देश में किसान कर्ज और कम पैदावार के कारण लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट के तथ्य नए सिरे से इस आशंका की पुष्टि करते हैं कि कर्जदारी और दिवालिया होना किसान-आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह है।

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