किसानों की कर्ज माफी के लिए योगी को केंद्र से मदद नहीं

नई दिल्ली/ नगर संवाददाताःकेंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गुरुवार को यह लगभग स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार को किसानों के कर्ज माफ करने के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए अपने दम पर संसाधन जुटाने होंगे। इस बारे में संकेत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में दिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों के कर्ज माफ करने के प्रधानमंत्री मोदी के वादे को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल के एक स्पष्टीकरण मांगने पर जेटली ने कहा, ‘अगर कोई राज्य सरकार सक्षम है और उस दिशा में बढ़ना चाहती है तो राज्य को अपने संसाधन जुटाने होंगे।’ जेटली ने कहा, ‘ऐसी स्थिति नहीं आएगी जिसमें एक राज्य की मदद की जाएगी और अन्य राज्य की नहीं।’ जेटली ने यह बात महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों की ओर से किसानों के कर्ज माफ करने की मांग उठने के संबंध में कही। उनके जवाब से यह संकेत मिला कि केंद्र सरकार पूरे देश में किसानों के कर्ज माफ करने पर विचार नहीं कर रही है। जेटली ने किसी राज्य का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बात से यह स्पष्ट हो गया कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की नई सरकार को राज्य में छोटे और मझोले किसानों के कर्ज माफ करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए अपने संसाधन जुटाने होंगे। इस बारे में बीजेपी के सूत्रों ने कहा कि पार्टी अपने चुनावी घोषणापत्र को तैयार करने के समय से इस बात को लेकर स्पष्ट थी कि इस वादे को पूरा करने के लिए कोई केंद्रीय मदद नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि घोषणापत्र तैयार करने वाली पार्टी की टीम ने अनुमान लगाया था कि इस वादे को पूरा करने के लिए से 16,000 करोड़ रुपये से सूत्रों ने बताया कि उस समय ऐसी योजना थी कि बीजेपी की राज्य सरकार कृषि क्षेत्र के इन कर्जों की देनदारी लेगी और इसके लिए बैंकों से मोलभाव कर रकम लगभग 4,000 करोड़ रुपये की सालाना किस्त के जरिए चार वर्षों में चुकाने की कोशिश की जाएगी। इससे राज्य के बजट को असंतुलित होने से बचाया जा सकेगा और कर्ज चुकाने की अवधि मौजूदा सरकार के कार्यकाल से अधिक नहीं होगी।

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