उलेमाओं ने बैठक कर दहेज के खिलाफ फूंका बिगुल

बेगूसराय, बिहार/शिव शंकर लालः भारतीय समाज में रिश्तों के अपनेपन को अगर किसी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है तो वह और कोई नहीं बल्कि दहेज की प्रथा है। दहेज की बुराई ने किसी भी धर्म को नहीं बख्शा है। दहेज की बुराई से न सिर्फ रिश्ते को ख्ररीदा और बेचा जाता है बल्कि समाज में तमाम लड़कियां बिन ब्याहे ही रह जाती हैं। कई बार योग्य लड़कियों को योग्य वर सिर्फ दहेज के कारण नहीं मिल पाता है। दहेज रूपी दानव से समाज को बचाने के लिए सामुदायिक भवन मिरचाइबाड़ी में सोमवार को मुस्लिम उलेमाओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता मुश्ताक करीमी ने की है। संयोजक नसीम अख्तर ने कहा कि दहेज न केवल इस्लाम के विरूद्ध हैं, बल्कि इसके कारण समाज में अनगिनत बुराई की जड़ है। उन्होंने बताया की इस प्रथा को समाप्त करना जहां हर नागरिक का दायित्व है, वहीं मुस्लिम समुदाय में इसकी जिम्मेदारी उलेमा पर है। ताहिर हुसैन और महबूब आलम फैजी सहित सभी वक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया की सीमांचल के हर जिले में कमिटी बनाई जाए। जिसके अधीन गांव स्तर की कमिटी होगी। इसके अतिरिक्त समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को दहेज के खिलाफ जागरुक किया जाएगा। बैठक में दहेज रूपी कैंसर को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया गया।

Share This Post

Post Comment