जननी सुरक्षा कि धज्जियॉ उड़ा रहे कर्मचारी

नागौर, राजस्थान/भुराराम जॉगीड़ः हम बात कर रहे है मैड़ता रौड़ सरकारी अस्पताल कि जहॉ अस्पताल के कर्मचारियो द्वारा किसी को भी सरकारी सेवाएं नहीं मिल पा रही है। देखा जाए तो प्रत्येक माह के 9 तारीख को लगने वाले प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान शिविर के तहत महिलाएं अस्पताल में आती है तो उन्हें बता दिया जाता है कि अगर कोई महिला 5 माह तक गर्भ से है तो उन्हें बताया जाता है कि आपको यह सुविधाएं सातवें महीने के बाद मिलेगी। अगर कोई महिला 5 माह ज्यादा गर्भ से है तो उन्हें बताया जाता है कि आपको मुफ्त में सोनोग्राफी एवं मिलने वाली सुविधाएं पांचवें माह से पहले ही मिल जाती है। इसके अलावा कोई भी सरकारी कर्मचारी को अपनी ड्यूटी को लेकर लगाव नहीं है। हर मरीज के साथ टालमटोल जैसी बात कर दी जाती है जब की जान पहचान के मरीजों के लिए तो सरकारी कर्मचारी पूरा अस्पताल उनके सामने सौंप देते हैं। सबसे बड़ी बात एक तरफ सरकार की हर कोशिश स्वच्छ भारत है जबकि दूसरी ओर लगभग यहां सभी सरकारी अस्पतालों में हर कोने में कचरे के ढेर लगे हैं। अस्पताल चारों तरफ से गंदगी से पसरा हुआ है। यहां तक की छोटे बड़े हादसे दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को भी प्राथमिक उपचार करके मेड़तासिटी रेफर कर दिया जाता है। हाल ही में जायल थाना क्षेत्र के बड़ी खाटू गांव में एक पौने 2 साल का मासूम हर्षित नाम के लडके पर गलत टीकाकरण की वजह से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए आखिरकार कल सुबह जयपुर के अस्पताल में अपनी जान गंवा बैठा। जन्म के 6 माह के बाद परिजनों ने गांव बड़ी खाटू के सरकारी अस्पताल में हर्षित को डीपीटी का टीका लगवाया था जिसके 5 दिन बाद से ही उसके हाथ की सूजन बढ़ने लगी और हाथ में कैंसर हो जाने की वजह से उसके गरीब पिता चारों तरफ की दर दर की ठोकरें खाते हुए भटकते हुए आखिरकार अपने बच्चे को गंवा बैठे। इस में भी एक लापरवाही का सबसे बड़ा कारण सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों का गलत टिंकाकरण ही है।

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